रात के 12 बज चुके थे। छोटे से गाँव राजापुर में बहूत ही सन्नाटा छ गया था। राजापुर गरीब कीबस्ती है। इसी बस्ती के एक कोने में हरिया का घर है। हरिया एक गरीब किसान है। हरिया अपने घरके एक अँधेरी कोठरी में अक्सर की तरह अपनी बीबी की चुदाई में मशगुल था। हरिया की उमर 50साल की है। और उसकी बीबी की उमर 45 साल की है। हरिया अपनी बीबी की चूत में लंड डाल करकाफ़ी देर तक उसकी चुदाई कर रहा था। उसकी बीबी मुन्नी बिना किसी ख़ास उत्तेजना के अपने दोनोंपैर फैला कर यूँ ही पड़ी थी जैसे की उसे हरिया के बड़े लंड की कोई परवाह ही न हो या फिर कोईतकलीफ ही न हो रही है। केवल हर धक्के पर धीमे से आह आह की आवाज निकल रही थी। मुन्नीकी बुर कब का पानी छोड़ चुका था। थोडी ही देर में हरिया का लंड से माल निकलने लगा तो वो भीआह आह कर के मुन्नी के चूची पे अपना मुह रख दिया और उसके बदन पर लेट गया । वो मुन्नी कीबेजान चूची को उसने मुह में ले कर चूसने लगा। थोड़ी देर के बाद उसने अपना लंड मुन्नी के बुर सेनिकाला और बगल में लेट गया। उसने अपनी बीडी जलाई और पीने लगा। मुन्नी उसके लटक रहेलंड को अपने हाथों में ले लिया और उस को सहलाने लगी। लेकिन अब हरिया के लंड में कोई उत्साहनही था। वो एक बेजान लत की तरह मुन्नी के हाथो का खिलौना बना हुआ था।
मुन्नी के कहा - एक बार और चोदो न. कुछ पता भी नहीं चला कि कब मेरा माल निकल गया.
हरिया- नहीं अब नहीं, तेरी चूत अब एकदम सुखी हो गयी है. तेरे चूत से पानी निकल जाता है .एकदम बेजान चूत हो गयी है तेरी. तेरे चूत कि चुदाई में अब कुछ मज़ा नही आता. गीली चूत चोदनेका मज़ा ही कुछ और था.
मुन्नी ने मन मसोस कर हरिया के लंड को अपने मुह में ले कर चूसने लगी कि कहीं शायद ये फिर सेखड़ा हो जाए और एक बार और चुदाई कर दे. लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. कुछ देर चूसने के बादभी हरिया का लंड लटकता ही रहा. थक हार कर मुन्नी बगल में चुपचाप लेट गयी. हरिया उसकी एकचूची को यूँ ही बेमन से दबा रहा था और किसी और विचार में खोया हुआ था.
अचानक मुन्नी ने कहा- जानते हो जी ! आज क्या हुआ?
हरिया ने कहा- क्या?
मुन्नी ने कहा- रोज़ की तरह आज में और मालती ( मुन्नी की बहु) सुबह शौच करने खेत गए । वहांहम दोनों एक दुसरे के सामने बैठ कर पैखाना कर थे.... तभी मैंने देखा कि मालती अपने बुर मेंऊँगली घुसा कर मुठ मारने लगी।
मैंने पूछा ये क्या कर रही है तू?
तो उसने मेरी पीछे की तरफ़ इशारा किया और कहा - जरा उधर तो देखो अम्मा।
मैंने पीछे देखा तो एक कुत्ता एक कुतिया पे चढा हुआ है।
मैंने कहा- अच्छा, तो ये बात है।
मालती ने कहा- देख कर बर्दाश्त नही हुआ इसलिए मुठ मार रही हूँ।
मैंने कहा - जल्दी मुठ मार , घर भी चलना है।
मालती ने कहा- हाँ अम्मा , बस अब निकलने ही वाला है।
और एक मिनट हुए भी ना होंगे कि उसके चूत से इतना माल निकलने लगा कि एक मिनट तकनिकलता ही रहा।
मैंने पूछा- क्यों री , कितने दिन का माल जमा कर रखा था?
उसने कहा- कल दोपहर को ही तो निकाला था।
मैंने भी सोचा- कितना जल्दी इतना माल जमा हो जाता है।
मुन्नी की कहानी सुनने के बाद हरिया ने कहा- वो अभी जवान है ना। अभी तो बेचारी 20 साल की भीठीक से नहीं हुई है. और फिर उसकी गर्मी शांत करने के लिए अपना बेटा भी तो यहाँ नही है ना।कमाने के लिए परदेश चला गया। अरे में तो मना कर रहा था। 3 महीने भी नही हुए उसकी शादी कोऔर अपनी जवान पत्नी को छोड़ कमाने बम्बई चला गया। बोला अच्छी नौकरी है। अभी बताओ चारमहीने से आने का नाम ही नही है। बस फोन कर के हालचाल ले लेता है। अरे फोन से बीबी की गर्मीथोड़े ही शांत होने वाली है? अब उसे कौन कहे ये सब बातें खुल के?
थोडी देर शांत रहने के बाद मुन्नी फिर से हरिया के लंड को हाथ में ले कर खेलने लगी।
हरिया ने मुन्नी की चूची को दबाते हुए उस से पूछा- क्या तुम रोज़ ही उसके सामने बैठ के पैखानाकरती हो?
मुन्नी ने कहा- हाँ।
हरिया- तब तो तुम दोनों एक दूसरे का बुर रोज़ देखती होगी।
मुन्नी- हाँ, बुर क्या पूरा गांड भी देखा है हम दोनों ने एक दूसरे का। बिलकूल ही पास बैठ कर पैखानाकरते हैं।
हरिया - क्या वो अक्सर मुठ मारती है?
मुन्नी - हाँ. लगभग हर दुसरे दिन मार ही देती है. यहाँ भी अपने कमरे में लगभग हर रात को मुठ मारती है. कई बार तो जब तुम खेत जाते हो तो हम दोनों घर के आँगन के कुएं पर नंगी हो के मेरे साथ नहातें हैं और वो वहाँ भी मेरे सामने ही मुठ मार देती है. कभी कभी तो मुझे भी गरमी चढ़ जाती है तो वो ही उसी समय कुएं पर मेरा भी मुठ मार देती है. बड़ी मस्त कुड़ी है.
हरिया- अच्छा , एक बात तो बता। उसका बुर तेरी तरह काला है या गोरा?
मुन्नी- पूरा गोरा तो नही है लेकिन मेरे से साफ़ है। मुझे उसके बुर पर के बाल बड़े ही प्यारे लगते हैं।बड़े बड़े और लहरदार रोएँ की तरह बाल। कई बार तो मैंने उसके बाल भी छुए हैं।
हरिया- क्यों?
मुन्नी - क्या करूँ? बेचारी बच्ची है. कभी कभी जिद पकड़ लेती है कि आज तू ही मेरी मुठ मार दे. इसलिए मै उसकी चूत में उंगली डाल कर मुठ मार देती हूँ. बेचारी को थोड़ी शान्ति मिल जाती है.
हरिया- बुर कैसा है उसका?
मुन्नी- बुर क्या है लगता है मानो कटे हुए टमाटर हैं। एक दम फुले -फुले, लाल -लाल।
अचानक मुन्नी ने महसूस किया की हरिया का लंड खड़ा हो रहा है। वो समझ गई की हरिया को मज़ाआ रहा है।
वो बोली- अच्छा ,एक बात तो बताओ।
हरिया बोला- क्या?
मुन्नी- क्या तुम उसे चोदोगे?
हरिया- ये कैसे हो सकता है?
मुन्नी- क्यों नही हो सकता है? वो जवान है । अगर गर्मी के मारे किसी और के साथ भाग गई तो क्यामुह दिखायेंगे हमलोग गाँव वालों को? अगर तुम उसकी गर्मी घर में ही शांत कर दो तो वो भला किसीदूसरे का मुह क्यों देखेगी। जब वो किसी कुत्ते-कुतिया को देख कर मुठ मार सकती है तो वो किसी केसाथ भी भाग सकती है। कितना नजर रख सकते हैं हम लोग? थोड़े दिन की तो बात है । फिर हमाराबेटा मोहन उसे अपने साथ बम्बई ले जाएगा तब तो हमें कोई चिंता करने की जरूरत तो नही है न।
हरिया- क्या मालती मान जायेगी?
मुन्नी ने कहा- कल रात को में उसे तुम्हारे पास भेजूंगी। उसी समय अपना काम कर लेना।
हरिया का लंड पूरा जोश में आ गया।
उसने मुन्नी की बुर में अपना लंड डालते हुए कहा- तुने तो मुझे गरम कर दिया रे।
मुन्नी ने मुस्कुरा कर अपनी दोनों टांगें फैला दी और जान बुझ कर जोर जोर से आह आह की आवाज़निकने लगी। हालंकि उसे कोई ख़ास दर्द नही हो रहा था लेकिन वो अपनी बहु को सुनाने के लिए जोरजोर से बोलने लगी- आह -आह, धीरे धीरे चोदो ना। दर्द हो रहा है।
ये आवाज़ बगल के कमरे में सो रही उसकी बहु मालती को जगाने के लिए काफ़ी थी। चुदाई की मीठीदर्द भरी आवाज़ सुन कर मालती का बुर चिपचिपा गया। वो अपने पिया मोहन के लंड को याद कर केअपने बुर में ऊँगली डाली और दस मिनट तक ऊँगली से ही बुर की गत बना डाली।
सुबह हुई । दोनों सास बहु खेत गई । दोनों एक दूसरे के सामने बठी कर पैखाना कर रही थी।
मालती ने अपनी सास मुन्नी की बुर देख कर बोली- अम्मा, तुम्हारा बुर कुछ सुजा हुआ लग रहा है।
मुन्नी ने मुस्कुरा कर कहा- ये जो तेरे ससुर जी हैं न बुढापे में भी नही मानते। देख न कल रात कोइतना चोदा की अभी तक दुःख रहा है।
मालती ने कहा- एक बात पूछूं अम्मा?
मुन्नी- हाँ, पूछ न।
मालती- बाबूजी का लंड खड़ा होता है अभी भी?
मुन्नी- हाँ री। खड़ा क्या? लगता है बांस का कहता है। जब वो मुझे चोदते हैं तो लगता है की अब मेरीबुर तो फट ही जायेगी।
मुन्नी ने देखा की मालती अपनी ऊँगली अपने बुर में घुसा दी है।
मुन्नी ने पूछा- क्या हुआ तुझे? क्या फिर कोई कुत्ता है यहाँ ?
मालती बोली- नही अम्मा, मुझे तुम्हारी बातें सुन के गर्मी चढ़ गई है। इसे निकालना जरूरी है।
मुन्नी बोली- सुन, तू एक काम क्यों नही करती? आज रात तू अपने ससुर के साथ अपनी गर्मी क्योंनही निकल देती?
मालती चौंक कर बोली- ये कैसे हो सकता है? वो मेरे ससुर हैं।
मुन्नी बोली- अरे तेरी जरूरत को समझते हुए मैंने ऐसा कहा। तुझे इस समय किसी मर्द की जरूरतहै। अब जब घर में ही मर्द मौजूद हो तो क्यों नही उसका लाभ उठा जाए।
मालती का मन अब डोल चुका था।
वो बोली- कहीं बाबूजी नाराज हों गए तो ?
मुन्नी बोली- अरे तू आज रात को उनके पास चले जाना। में बहाना बना के भेज दूँगी। धीरे धीरे रातके अंधेरे में जब तू उनको छुएगी ना , तो तू भूल जायेगी की तू उनकी बहु है और वो भूल जायेगे कीवो तुम्हारे ससुर हैं।
ये सुन कर मालती के बुर में मानो तूफ़ान आ गया। उसके बुर से इतना पानी निकलने लगा कीमुन्नी को लगा की ये पेशाब कर रही है। अब मुन्नी खुश थी। दोनों तरफ़ मामला सेट था।
रात हुई। खाना- वाना ख़तम कर मुन्नी हरिया के कमरे में गई और हरिया को बता दी कि मै मालतीको भेज रही हूँ। वो चुदवाने के लिए तैयार है. तुम सिर्फ़ थोडी पहल करना।
कह के वो बाहर चली आई।
और बहु से बोली- बहु, ओ बहु, सुन आज मेरी तबियत कुछ ठीक नही है। तू जरा अपने ससुर जी कोतेल तो लगा दे।
फिर दरवाजे के बाहर से हरिया को बोली- सुनते हों जी , में जरा छत पर सोने जा रही हूँ। मालती बहुसे तेल लगवा लेना।
इस प्रकार मालती को लगा कि ससुर जी को मेरे मन की बात पता नहीं है और उसे नहीं पता चला किससुरजी उसको चोदने के लिए किस तरह बेताब है. . जब कि हरिया को सब कुछ पहले से ही पताथा.
मालती जैसे ही दरवाजे के पास आई मुन्नी ने उस से धीरे से कहा - देख मैंने बहाना बना कर तुम्हेउनके पास भेज रही हूँ। मालिश करते करते उनके लंड तक अपना हाथ ले जाना। शर्माना नही। अगरउनको बुरा लगे तो कह देना की अंधेरे में दिखा नही। अगर कुछ नही बोले तो फिर हाथ लगाना। जबदेखना कि कुछ नही बोल रहे हैं तो समझना की उन्हें भी अच्छा लग रहा है। ठीक है ना? अब मैंचलती हूँ।
कह कर मुन्नी छत पर चली गई। इधर मालती हाथ में तेल की शीशी लिए हरिया के कमरे में आई।
हरिया ने कहा- आजा बहु । वैसे तो तेल मालिश की जरूरत नही थी, लेकिन आज मेरा पैर थोड़ा सादर्द कर रहा है इसलिए मालिश जरूरी है।
मालती हरिया के बिस्तर पर बैठ गई। कमरे में एक छोटी सी डिबिया जल रही थी। जो कि पर्याप्तरौशनी के लिए भी अनुकूल नही थी।
मालती ने कहा- कोई बात नही। में आपकी अच्छे से मालिश कर देती हूँ। आप ये लूंगी उतार ले।
हरिया ने कहा- बहु, जरा ये डिबिया बुझा दे , क्यों की मैंने लूंगी के अन्दर छोटी सी लंगोट ही पहनरखी है।
मालती ने डिबिया बुझा दी। अब वहां घुप अँधेरा छा गया। सिर्फ़ बाहर की चांदनी रात की हलकीरोशनी ही अन्दर आ रही थी। हरिया ने लूंगी उतार दी।अब वो सिर्फ लंगोट में था. मालती की सांसेतेज़ हों गई। वो तेल को हरिया के पैरों में लगाने लगी। धीरे धीरे वो हरिया के जांघों में तेल लगानेलगी। धीरे से उसने जान बुझ कर हरिया के लंड तक अपना हाथ ले गई। हरिया ने कुछ नही कहा।मालती दुबारा हरिया के लंड पर हाथ लगाया। और तेल को वो जांघों और लंड के बीच लगाने लगी।जिससे वो बार बार हरिया के अंडकोष पर हाथ लगा सकती थी। हरिया ने जब देखा की बात लगभगबन चुकी है। उसने अपनी लंगोट की डोरी को कब खोल दिया मालती को पता भी ना चला। धीरे धीरेजब वो हरिया के अंडकोष पर हाथ फेर रही थी तो उसी के हाथ से उसकी लंगोट हट गई। लंगोट हटनेपर मालती पूरी गरम हों गई। क्यों कि हरिया अब पूरी तरह से नंगा हो चुका था. खिडकी से आ रहीचांदनी रात की हलकी हलकी रोशनी में वो हरिया के लंड को साफ़ साफ़ देख सकती थी. अब वो हरियाके लंड को छूने की कोशिश कर रही थी। धीरे धीरे उसने लंड पर हाथ लगाया और हटा लिया। हरियाका लंड सोया हुआ था। लेकिन ज्यों ही मालती ने हरिया का लंड छुआ मालती के जिस्म में एकसिरहन सी दौड़ गई। अब वो दुबारा अपना हाथ हरिया के दूसरे जांघ पर इस तरह ले गई जिस सेउसकी कलाई हरिया के लुंड को छूती रहे। हरिया भी पका हुआ खिलाड़ी था। उसका लंड जल्दी खड़ाहोने वाला नही था। उसे तो पता था कि मालती चुदवाने के लिए पूरी तरह से तैयार है .
हरिया ने कहा- बहु, अब जरा मेरे जांघ पर बैठ कर मेरे सीने की मालिश कर दे. इस से मेरे जांघ कादर्द भी कम हो गायेगा.
मालती बोली - बाबूजी आपके जांघ में तो काफी सारा तेल लगा हुआ है . आपकी जांघ पर मै बैठूंगीतो मेरी साड़ी में तेल लगने से ये खराब हो जायेगी.
हरिया- तुम अपनी साड़ी खोल दो ना। वैसे भी तेल लगने से सारी ख़राब हों सकती है।
मालती ने कहा- बाबूजी , साड़ी के नीचे मैंने पेटीकोट नही पहना है। इसलिए मै साड़ी नही खोलसकती।
हरिया ने कहा- अगर तू अन्दर कुछ नही पहनी है तो क्या हुआ? वैसे भी अंधेरे में में तुम्हे देख थोड़े हीपा रहा हूँ जो तुम यूँ शरमा रही हों?
मालती तो ये चाहती थी। उसने सोचा कि जब ससुरजी ही उसे नंगी होने के लिए कह रहे हैं तो उसे देरनहीं करनी चाहिए. उसने अपनी साड़ी खोल के एक किनारे रख दिया। अब वो सिर्फ ब्लाउज पहने हुईथी. और उसने कमर के नीचे कुछ भी नहीं पहन रखा था.
वो हरिया के जांघ पर इस तरह से बठी की उसकी चूत हरिया के लंड में पूरी तरह से सटने लगी.उसकी नरम गांड हरिया के सख्त जांघ पर इस तरह थी मानो पत्थर पर कमल का फूल. हरिया कोउसकी नरम नरम गांड का अहसास होने लगा. मालती भी अपने चूत से अपने ससुर के लंड को छूनेके लिए अब बेताब होने लगी.वो हरिया की जांघ पर बैठे बैठे उसके सीने की मालिश करने लगी. मालिश करते करते वो अपना हाथहरिया के सीने से लेकर उसके लंड तक लेते आती. जब भी वो हरिया के सीने की तरफ अपना हाथआगे बढ़ाती तो अपनी चूत से अपने ससुर के लंड को दबाने की कोशिश जरुर करती. और वापसी मेंअपने हाथ को उसके लंड तक लाती.उसने अपने लंड को ढीला रखा हुआ था. मालती अपना हाथ कई बार हरिया के लंड के ऊपर से छूतीहुई नीचे लाती. धीरे धीरे उसने हरिया के लंड पर हाथ फेरना चालु किया. वो अँधेरे में उसके लंड कोइस तरह छू रही थी मानो वो अनजाने में ऐसा कर रही हो. अब हरिया में भीतर तूफ़ान उठना शुरू होगया. वो समझ गया की लोहा गरम है और यही सही समय है चोट मारने का. उसने अपने हाथ सेअपनी बहु की नंगी जांघ पर हाथ रखा और चिकनी जांघ पर हाथ फेरने लगा. उसकी बहु को मज़ाआने लगा. उसने अपने हाथ में हरिया का लंड पूरी तरह पकड़ लिया. और उसे दबाने लगी. अब थोडाथोडा हरिया का लंड खडा होने लगा. लेकिन वो पूरी तरह से इसे खड़ा नहीं किया और हरिया ने अपनेहाथ को धीरे धीरे अपनी बहु की गांड पर फेरना चालु कर दिया. अब मालती को पूरा यकीन हो गया कीससुरजी भी चोदने के लिए तैयार हैं. हरिया का हाथ अपनी बहु की गांड की दरार में कुछ खोजने लगा.एक बार जैसे ही मालती आगे की और झुकी वैसे ही हरिया ने मालती की गांड की छेद में अपनीऊँगली घुसा दिया. मालती तड़प गयी. लेकिन वो कुछ नहीं बोली. वो सिर्फ आगे की और झुकी रही.और नीचे से उसके ससुर उसकी गांड में उंगली करता रहा. अब मालती अपने रंग में आई और लपककर अपने ससुर के लंड पर अपने चूत को पूरा सटा दी. अब मामला पूरी तरह से साफ़ हो चुका था.
हरिया ने अपने शरीर पर झुकी हुई अपनी बहु को एक हाथ से लपेटा और अपने बदन पर सटा दिया.अब मालती की चूची हरिया के सीने पर रगड़ खाने लगी. हरिया अपनी बहु की गदराई नरम देह कोअपने सख्त शरीर में कस कर सटा रहा था.
उसने बहु को पकड़ कर अपने बगल में लिटा दिया और उसके चूची पर हाथ रख के बोला- ब्लाउजखोल दे.
मालती ने अपने ब्लाउज का हुक खोल दिया। हरिया ने ब्लाउज को मालती के चूची पर से अलग करदिया और चूची को छूने लगा।
वो मालती के चूची को मसलने लगा। मालती की चूची गदराई जवानी का प्रतीक थी.
हरिया बोला- तेरी चूची तो एक दम सख्त है। में तेरी चूची छू रहा हूँ, तुझे बुरा तो नही लग रहा है न?
मालती बोली- नही, आप मेरे साथ कुछ भी करेंगे तो में बुरा नही मानूंगी।
हरिया ने कहा- शाबाश बहु, यही अच्छे बहु की निशानी है। बोल तुझे क्या चाहिए?
मालती- बाबूजी मुझे कुछ नही चाहिए, जो आपकी मर्ज़ी हो वो दे दें ।
हरिया- बहुत दिन से प्यासा हूँ. जरा मुझे अपनी चूत का पानी पिला दे ना .
मालती- अब देर किस बात की?
हरिया ने नीचे जा कर मालती के बुर को पहले तो छुआ फिर, मुंह में ले कर चूसने लगा।
मालती बोली- ऐसे मत चूसिये बाबूजी , मै मर जाऊंगी।
लेकिन हरिया नहीं माना. वो तो इस तरह इसे चूस रहा था मानो कोई आम की गुठली चूस रहा हो.मालती अपनी आँख बंद कर के अपने दोनों हाथ से अपने सर के पीछे रखे तकिये को जोर से पकड़कर दबाये हुए मचल रही थी. उसका नंगा बदन सांप की तरह अंगडाई ले रहा था. थोड़ी देर में हीमालती के चूत ने पानी छोड़ दिया. हरिया ने मालती की चूत से बहती हुई पुरी पानी को चाट चाट करपी लिया.
अब हरिया उठ खड़ा हुआ और, मालती के हाथ में अपना लंड थमा दिया। मालती के हाथ मानो कोईखजाना मिल गया हों। वो हरिया के लंड को कभी चूमती कभी खेलती. लेकिन वो कुछ निराश भी थीक्यों की ससुरजी का लंड आधा ही खडा हुआ था. जबकि सासुजी ने कहा था कि ससुरजी का लंड बांसकी तरह टाईट हो जाता है. लेकिन मालती फिर भी इस आधे खिले हुए लंड को ही अपने प्यासे चूत मेंडालने के लिए बेताब थी.
वो बोली-बाबूजी, इसको मेरे बुर में एक बार डाल दीजिये न।
हरिया ने अपने लटके हुए लंड को हाथ से पकड़ कर मालती के बुर में घूसा दिया। मालती के बुर मेंहरिया का लंड जाते ही फुफकार मरने लगा। और मालती के बुर में ही वो खड़ा होने लगा।
मालती- बाबूजी ये क्या हों रहा है? जल्दी से निकल दीजिये।
हरिया- कुछ नही होगा बहु। अब हरिया का लंड पूरी तरह से टाइट हों गया। अब हरिया का लंडसचमुच बांस कि तरह टाईट और बड़ा हो गया था. मालती दर्द से छटपटाने लगी। उसे यह अंदाजा हीनही था की जिसे वो कमजोर और बुढा लंड समझ रही थी वो बुर में जाने के बाद इतना विशालकायहों जाएगा। हरिया ने मालती को चोदना चालू किया। पहले दस मिनट तक तो मालती बाबूजी बाबूजीछोड़ दीजिये कहती रही। लेकिन हरिया नही सुना, वो धीरे धीरे उसे चोदता रहा। दस मिनट के बादमालती का बुर थोड़ा ढीला हुआ। अब उसे भी अच्छा लग रहा था। दस मिनट और हरिया ने मालतीकी जम के चुदाई की। तब जा कर हरिया के अन्दर का पानी बाहर आने को हुआ तो उसने अपना लंडमालती के बुर से निकल के मालती के मुंह में लगा दिया बोला - पी जा।
मालती ने हरिया के लंड को मुंह में ले कर ज्यों ही दो- तीन बार चूसा की हरिया के लंड से तेज़ धारनिकली जिस से मालती के पूरा मुह भर गया। मालती ने सारा का सारा माल गकत लिया। आज जाकर मालती की गर्मी शांत हुई।
उस के बाद फिर थोड़ी देर के बाद ससुर और बहु के बीच सम्भोग का खेल चालु हुआ. इस बार काफीइत्मीनान हो कर हरिया अपनी बहु मालती की चुदाई कर रहा था. मालती अब जोर जोर से आह आहकी आवाज निकाल रही थी ताकि उसकी सास भी सुन ले और ये जान ले कि उनकी प्लानिंगकामयाब हो गयी है. इस बार जब हरिया का माल निकालने को आया तो मालती ने कहा- इस बारचूत में ही निकाल लीजिये. हरिया ने वैसे ही किया. 2 मिनट तक उसके लंड से माल निकलता रहाऔर मालती के चूत में गिरता रहा. हरिया मालती के चूत में लंड डाले हुए ही सो गया और मालती कोभी कब नींद आ गयी उसे भी पता ना चला.
सुबह के चार बजे जब मुन्नी छत पर से नीची आई और अपने कमरे में गयी तो देखती है कि उसकापति हरिया अपनी बहु मालती के चूत में लंड डाले हुए उसके नंगे बदन पर सो रहा है. देख कर मुन्नीको थोड़ी ख़ुशी हुई कि चलो आखिर मेरी बहु मेरे घर के काम आई. उसने जा कर अपने बहु को हिलाकर जगाया. थकी हुई बहु की आँखे खुली तो अपने चूत में अपने ससुर जी का लंड देख कर औरसामने अपनी सास को देख कर थोड़ी शर्म आई. उसने प्यार से ससुरजी के लंड को अपने चूत सेनिकाला और ससुर जी को जगाया. हरिया की भी आँख खुल गयी. उसने जब अपने आप को नंगाऔर अपनी बहु को नंगा देखा तो उसे सारी बात याद आ गयी.
मुन्नी ने पूछा- अरे मालती, मैंने तो तुम्हे इनकी मालिश करने को कहा था. इन्होने ने तो तेरी हीमालिश कर दी. रात भर मालिश करवाती रही क्या?
मालती ने मुस्कुरा कर कहा- नहीं अम्मा, सिर्फ 3 बार !
मुन्नी ने हरिया से कहा- क्यों जी , कैसी लगी मेरी बहु के हाथो की मालिश? मज़ा आया? मेरी फुलजैसी बहु को तुमने ज्यादा मालिश तो नहीं कर दी ना?
हरिया ने कहा - हमारी बहु के हाथों में तो जादू है. अब रोज़ ही मै इसकी और ये मेरी मालिश लियाकरेगी.
मुन्नी ने हँसते हुए कहा- हाँ , क्यों नहीं. वैसे भी अब मेरे हाथ में वो बात कहाँ जो मालती बहु के हाथमें है.
उसके बाद मालती रोज़ ही अपने ससुर के साथ ही सोने लगी. रात भर दोनों एक दुसरे की बदन कीमालिश करते और मालती जी भर कर चुदवाती.
हाँ दो- तीन दिन में उसकी सास मुन्नी भी साथ सोने लगी। अब हरिया एक तरफ करवट ले कर बीबीको चोदता तो दूसरी तरफ़ करवट ले कर अपनी बहु मालती को

मस्त
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