सोमवार, 1 फ़रवरी 2016

होली के रंग गोरियोंके संग


ये प्रथा भारत में सभी जगह पे है| होली के दिन किसिस के ऊपर भी किसी भी प्रकार की रोक टोक नहीं|
कोए भी किसीके साथ रंग खेल सकता है| ये उत्तर भारत में जोरो शोरो और उत्साह के साथ खेला जाता है|
ये वसंत रुतु के आगमन के साथ ही कामदेव और रति कामक्रीड़ा  करते है | उनके स्वागत के लिए और उनके बाणोंसे
सारा माहोल उत्तेजित जो जाता है|  इसलिए लोग अपने मनकी इच्छा  इसदिन पूरी करते है| मतलब जिसको चाहिए उसके साथ थोड़ी मस्ती कर सकते है| अब ऐसे दिन में दिनेश कुछ नहीं करेगा ऐसा तो हो ही नहीं सकता| उसने पहिलेसे सफ़ेद कपडे पहेनके रखे थे| और अब गोपियांका इंतजार कर रहा था|
कॉलेज के पिछेसे उसने साब व्यवस्था करके राखी थी| क्योंकि उधर ही उसके पिता का होटल था| आज लडकिय उसकी फ्रेंड्स सफ़ेद टी शर्ट नि सलवार कमीज़ पहेनके आये थे| उसने सबको होटल में आने का निमंत्रण दिया पार्टी के लिए| बस कॉलेज ख़तम होते ही वो लोग आ गए| दिनेश ने आते साथ ही सबके ऊपर अत्तर के पानी का वर्षाव किया|  साब तरफ गुलाब की पंखुड़िया बरस रही थी| सब गोपिया अब मस्त भीग गयी थी| उनोहे सीधा दिनेश को ढुंढणा चालू किया और सीधा स्विमिंग पुल के तरफ गए फिर क्या दिनेश ने सबको बरी बरी टंक अन्दर खीचा और शुरू हुआ कम क्रीडा का मजा.
अन्दर 5 लड़के और 5 लडकिय बस एक्दुस्रेको दबाने लगे| किसीका स्तन किसीके मुह में तो किसीका लैंड| फिर क्या सब बहोत जादा उत्तेजित हो गए और समूह सम्भोग करने लगे|  फिर सबने खूब मस्ती की और होली का मजा उठाया|

बदन की सोंधी महक मस्त


बदन की सोंधी महक, सुनने मे कुछ अजीब सा लगा रहा है; ये अजीब आपके लिए हो सकता है, लेकिन जो लोग बड़े वाले ठरकी होते है और सेक्स-संभोग जिन्दगी होती है वो इस बदन की खुशबु के दीवाने होते है और ये खुशबु उनको कहीं से भी खीच लाती है | आज मै आपको, अपने बारे मे ही, ऐसा कुछ बताने वाला हु | मेरा नाम समीर है और अब मै करीब ३२ साल का हु और मेरी शादी भी हो चुकी है और मेरे २ बच्चे भी है | लेकिन, ये सब जब हुआ, तब मै १९ साल का था और शादी तो होने का कोई सवाल ही नहीं होता | मैने स्कूल पास कर लिया था और कॉलेज मे नया-नया दाखिला लिया था और वहा पर मुझे कुछ नए दोस्त मिले थे और उन्होंने मुझे सेक्स के बारे मे काफी कुछ बताया था | मेरी रेगिंग भी सेक्स के साथ ही हुई थी | मुझे एक लड़की के साथ नंगा, एक अँधेरे कमरे मे बंद कर दिया गया था और मैने उस लड़की को छुआ तक नहीं | ये सब उस लड़की को इतना पसंद आया, कि उसका और मेरा प्यार हो गया और कॉलेज के चार साल, मैने उसको जमकर चोदा |उस लड़की का नाम सीमा था | सीमा और मै दोनों ही कॉलेज के खेलो मे भाग लेते थे और अक्सर बाहर आते जाते रहते थे और हम दोनों के माँ-बाप को ये मालूम था | एक बार, हम दोनों ने ही उसका फायदा उठाने का सोचा और मैने शहर के बाहर एक रेसोर्ट मे कमरा बुक करवा लिया और हम दोनों ही एक वीकेंड पर वाह चले गये ; सीमा ने बहुत ही सेक्सी ड्रेस पहनी हुई थी और मेरा सारे रास्ते बुरा हाल था और मैने सोच लिया था, कि रूम मे घुसते ही, सीमा को बहुत ही कामुक और बुरी तरह से चुदुंगा | हम दोनों रूम ले लिया और सीमा को रूम मे पहले घुसने दिया | सीमा के बाद, मै रूम मे घुसा और एकदम जोर से दरवाजा बंद कर दिया और सीमा को पीछे से पकड़कर गोद मे उठा लिया | सीमा जोर से चिल्ला उठी और हंसकर अपने को छुटाने लगी | मैने उसको और भी कसकर पकड़ लिया और पलंग पर पटक दिया | आज हम दोनों पहली बार सेक्स कर रहे थे, लेकिन हमने साथ मे ब्लूफिल्म काफी देखी थी और मैने सीमा को कई बार किस किया था और उसके चूचो को भी कई बार दबाया था और उसकी चूत मे भी काफी बार ऊँगली की थी और सीमा ने भी कई बार, मेरा लंड पकड़ा था और मेरा हस्त्मथुन किया था |सीमा को भी मस्ती आनी शुरू हो गयी और वो मुस्कुराती हुई पलंग पर बैठ गयी और अपनी टाँगे खोलकर अपनी ऊँगली से मुझे बड़े ही कामुक अंदाज़ मे बुलाने लगी | मैने भी मुस्कुराते हुए, अपने सारे कपडे खोलने शुरू कर दिये और एक ही बार मे पूरा नंगा हो गया | मेरा काला लंड पूरा बड़ा हो चुका था और सीमा की आँखों के सामने बड़े-बड़े झटके मार रहा था | मैने सीधे ही सीमा के ऊपर कूदी मार दी और सीमा के होठो पर अपने होठ रख दिये | हम दोनों के होठ बहुत ही गरम थे और हम दोनों की सांसे तेज-तेज चलने लगी | सीमा ने अपने हाथो मे मेरा लंड ले लिया और उसको पूरी तरह से दबा दिया और मैने सीमा के कपडे खोलने शुरू कर दिये और उसके चूचो को पूरी तरह से नंगा कर दिया | उसके बड़े चुचे और उनपर गुलाबी निप्पल देखकर मेरे मुह मे पानी आ गया और मैने अपना मुह सीमा के निप्पल पर लगा दिया और उसको मस्ती मे चूसने लगा और सीमा मस्ती मे मचलने लगी aaaahhhhhhh……………….ऊऊऊऊऊऊऊ……………….ऊऊऊऊउ…………..एस…………और वो मस्ती मे मेरा लंड और जोर से दबा रही थी……..आआआआआआआअ……………ऊऊऊऊ…..धीरे सीमा ……….मर गया………तोड़ेगी क्या? सीमा और मै, दोनों एक दुसरे से चिपके हुए थे और हम दोनों के शरीर गरम थे और मैने सीमा के बचे-कुचे भी कपडे उतार दिये और उसकी गुलाबी चूत देखकर मेरे लंड ने जोर से झटके मारने शुरू कर दिये |मैने आव-ना-देखा-ताव और अपने लंड सीमा की गुलाबी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया और सीमा की गांड मस्ती मे चलने लगी और वो कामुक आवाजो के साथ मस्ती मे कसमसाने लगी आआआआआआ……………ऊऊऊऊऊओ…………..एस………सेक्सी समीर………..जानेमन………….आजा…साले…..और मुझे अपने नाखुने से नोचने लगी | मुझे से भी अब रुका नहीं जा रहा था और मेरा लंड अपना पानी छोड़ने को बेताब था और मैने एक ही झटके मे अपना लंड सीमा की चूत मे गुसा दिया | सीमा दर्द के मारे चिल्ला उठी अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ह्म्म्म्म्म्म ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ………………….ऊऊऊओ……….मर गयी……….बहत ही गरम है | इतना बड़ा लंड, मेरी चूत की वाट लग गयी और उसने अपनी गांड ऊपर की तरफ चलनी शुरू कर दी | उसने मेरे शरीर को कसकर पकड़ लिया और अपनी गांड को जोर से धक्का मारने लगी  | हम दोनों के शरीर थप-थप की तेज आवाज़ के साथ टकराने लगे और हम दोनों के मुह से ही आवाज़े निकलने लगी आआआआआअ….ऊऊ..बस…और नहीं………आया……………आआआआअ………….ऊऊऊऊओ……..ऊऊऊऊऊउ……..मर गये…….वाह…..और कुछ ही देर मे हम दोनों की गांड तेज-तेज हिलने लगी और सीमा ने अपना पानी मेरे लंड पर छोड़ दिया |उसके पानी से, उसकी चूत एक दम चिकनी हो गयी और मेरा लंड अंदर फिसलने लगा, लेकिन मैने धक्के मारने जारी रखे और कुछ ही मिनट मे अपना पानी पूरा का पूरा सीमा की चूत मे निकाल दिया | सीमा वीर्य गरम होने के कारण तड़प उठी और तेजी से अपनी चूत मेरे लंड से निकालने लगी; लेकिन, मैने सीमा को कसकर पकड़ा हुआ था और मैने अपने वीर्य की बूंद- बूंद सीमा की चूत मे टपका दी | हम दोनों ही मस्ती मे थक चुके थे और नंगे ही सो गये | मैने सीमा को उस रात कई बार चोदा और ऐसा लगा, कि कोई काम काफी समय से छूट रहा था, वो पूरा हो गया | उसके बाद तो, सीमा और मै जहा भी जाते, साथ जाते और हर रात हमारी कामक्रीड़ा की रात होती |

बुधवार, 27 जनवरी 2016

पहली बार में इतना मज़ा

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प्यार किया किसी और से प्यार दिया किसी और ने


हाई दोस्तों, मेरी कक्षा में एक लड़की पढ़ती थी जिसका नाम निशु था, वो मुझसे दूर दूर ह रहती थी | उसके एक दोस्त थी जिसका नाम शेताल था | मैं शीतल को बहुत पसंद करता था पर वो मुझसे जादा बात नही करती थी | धीरे धीरे कर के मेरी और निशु की बात होने लग गयी | और उसके बाद शीतल से भी बात करने लग गयी | मुझे लगता था की शीतल भी मुझे पसंद करती हे पर बोलती नही हे | एक दिन क्या हुआ की मेने मजाक में शीतल को कहा की तुम अगर बाल ऐसे बनोगी तो जादा अच्छी लगोगी, और दूसरे दिन वो वेसे ही बाल बना के आ गयी | आने के बाद उसने मुझे दिखाया तो मेने कहा ऐसे नहीं ऐसे, तो दूसरे दिन वो फिर बदल के आ गयी और मुझसे पूछी | कुछ दिनों तक मेने उसके साथ ऐसे ही किया और मन में खुश हो गया की शीतल मुझसे प्यार करती हे | पर निशु ने मुझे बताया की वो सिर्फ तुझे अपना दोस्त मानती हे और कुछ नही, उसकी बात सुन के मेरे दिल पे पहाड टूट पड़ा और में उदास हो गया | मेने निशु को बोला की पहले क्यों नही बताई तू, वो बोली शीतल के बारे में सोचने से फुर्सत मिलेगा तब न बताउंगी | तू तो पुरे दिन उसी के बारे में ही सोचता रहता हे | मैं उदास हो के कक्षा के बाहर बैठा रहा और एक क्लास में नही गया, निचु को जब पता चला तो वो मुझे मानाने आ गयी और फिर मुझे बहुत माने और फिर मना के कक्षा में ले गयी |दूसरे दिन उसने मुझे अपने ही स्कूल के सबसे आखिरी फ्लोर में बुलाया और वहा मुझसे बात करने लगी और बोली की आज क्या कर रहा हे तू घरमे ? मेने कहा कुक नही वोही हर रोज की तरह खा पी के सो जाऊंगा और फिर खेलने चला जाऊंगा | वो बोली की एक काम कर आज मेरे घरपे आना, मुझे कुछ काम हे | वो क्या हे की मैं दस दिन के लिए अकेली हूँ तो तो घर में बहुत काम हे जो में अकेले नही कर सकती | मैं बोला थक हे टेंशन मत ले मैं आ जाऊँगा | उस वक्त तक मेरे मन में कुछ उलटे विचार नही थे | मैं दोपहर के खाने के बाद उसके घर पहुच गया, उसने दरवाज़ा खोला और उसे दख में झटका खा गया | क्या लगती थी वो उन कपड़ो में, स्कूल के कपड़ो में तो उतना खास नही लगती थी पर घरपे तो कुछ अलग ही बात थी उसकी | उसने गुलाबी रंग का टॉप डाला था और निचे उसने हाफ पेंट पहनी हुई थी | इसमे उसकी कमर का सही अंदाज़ा हो रहा था और उसकी टाँगे तो एक दम गोरी गोरी जिसमे एक बाल भी नही थे शायद, एक दम कमाल की लग रही थी वो | उसने मुझे अंदर बुलाया और पानी पिलाई और फिर मुझे बतेहने को कहा | मैं बैठ गया और फिर हम दोनों यहाँ वहा की बातें करने लगे |  वो मुझे अपनी घर की एल्बम दिखाने लग गयी, मेरा मन तो नही था पर देखना पड रहा था, उसे पता चल गया की मेरा मन नही हे देखना का, सो मई कही घर चला न जून इसीलिए उसने एल्बम एक तरफ रख दिया और मुझसे चिपक के बैठ गयी और मेरे आँखों में झाकने लग गयी, और बोली और सुना कुछ ? मैं बोला और क्या सुनना हे तुझे ये बता ? वो कुछ नही बोली बस मुझे दखती जा रही थी, उसकी आँखों में अजीब सा कुछ लग रहा था जेसे उसे कुछ चहिये और मन ही मन मुझसे मान रही हे ऐसा लग रहा था मुझे उसकी आँखों में देख के |मेने उसके होठो को झटके में चुप लिया, वो फिर भी मुझे देखती गयी और कुछ नही बोली | थोड़े देर के बाद मुझसे लिपट गयी और बोलने लगी समीर में तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, तुम मेरे हो और मेरे और किसी के नही हो | तुम अबसे सिर्फ मेरे हो और किसी के नही हो सकते तुम | मेने भी कह दिया हाँ निशु मैं भी तुमसे प्यार करता हूँ और तुम भी मेरी हो | अब वो मुझे दखने लग गयी और फिर मुझे चूमने लगी, मैं भी उसे चूमने लगा और उसे कस के गले लगा लिया | वो अब मेरे पीठ पे हाथ फेरने लग गयी और मुझसे एक दम लिपट गयी | अब हम दोनों एक दूसरे को चूमे जा रहे थे | वो मुझे उपर के कमरे में ले जाने लगी, पर में सोचा उपर जाके क्या करना हे सो मी उसे मना कर दिया और फिर मेने उसे उसके बिस्तर पे बिठा दिया और उसे फिरसे चूमने लगा, वो भी मेरा भर पुर साथ दे रही थी | हम दोनों करीब दस मिनट तक किस किये और फिर मेने उसे बिस्तर पे लेटा दिया और उसके उपर चड गया में और फिर उसे चूमने लगा, मैं उसके गालो को फिर उसके होठो को चूसने लगा | उसके होठो को चूसने में काफी मज़ा आ रहा था, कमाल के होठ थे उसके एक दम नरम नरम मज़ा आ गया था | वो मेरे मुह में अपना जीभ डाल देती और फिर हम दोनों एक दूसरे के होठो को चूसते रहते | मैं कुछ देर के बाद उसके छाती पे हाथ ले आया और फिर उसके चुचो को दबाने लग गया, उसके चुचे मुझे काफी बड़े बड़े लग रहे थे और बहुत नरम भी थे एक दम उसके होठो की तरह | मैं उठा और अपने कपडे उतार लिया और उसे भी बोला, पहले तो वो मना की पर फिर मान गयी जब मेने बोला तुम मुझसे प्यार नही करती क्या ? अब हम दोनों नंगे थे |उसकी चुत पे हल्के फुल्के बाल थे, पर चुत दिखाई दे रही थी | वो मेरा लंड दख के बोली, ये क्या हे इतना बड़ा सा ? वो बोली की उसने छोटे बच्चो का देखा हे पर वो तो उन्ग्लिस इ भी छोटे होते हे, ये तो हाथ जितना बड़ा हे | मेने बोला की वो बच्चे हे, मैं बड़ा हूँ इसीलिए मेरा ये भी बड़ा हे, और ये सिर्फ तुम्हारे लिए हे, आओ इसे प्यार करो | वो धीरे धीरे हाथ बढ़ाते हुए उसने मेरा लंड पकड़ा और फिर उसे हिलाने लग गयी, बिच बिच में मसल भी देती | कुछ देर के बाद, वो लेट गयी और में उसके चुचो को चूसने लग गया, उसके निप्पल एक दम गुलाभी रंग के थे और मुझे चूसने में बहुत मज़ा आ रहा था | वो सिसकिय भरने लग गयी थी, और मेरे सर पे हाथ फेरे जा रही थी | में उसके चुचो को बारी बारी से चूसता और मसलता रहता, वो मेरे कभी पीठ पे हाथ फेरती तो कभी मेरे सर पे, इसी तरह करीब बीस मिनट गुजर गए और फिर में उसकी चुत की तरफ आ गया | उसकी चुत पे तो पहले मेने ऊँगली फेरा और वो मचलने लग गयी, मुझे उसका मचलना दख के काफी मज़ा आया, सो मेने अपनी जीभ रख दी उसकी चुत पे और फिर दीरे धीरे उसकी चुत पे जीभ फेरने लग गया | अब उसकी जिस्म की गर्माहट मुझे साफ़ साफ़ महसूस हो रहा था, वो अब सिसकिय पे सिसकिय भरी जा रही थी और अपने सर को बिस्तर पर रगद रही थी, उसे दख के मुझे बहुत अच्छा लग रहा था | वो मेरे बालो पे हाथ फेरे जा रही थी और मै उसकी चुत पे कस कस के जीभ रगड रहा था, वो एक दम से पागल होए जा रही थी और मै उसकी चुत की पंखडियो को अपने होठो से काट रहा था और मस्ती किये जा रहा था | मैं उसकी चुत की पंखडियो को अपने होठो मै दबा के उसे बार बार खीच रहा था, उसकी चुत से लगातार पाने निकले जा रहा था | मुझे उसकी चुत की खुशबु पागल सा बना रही थी, क्या खुशबु थी उसकी चुत की मज़ा आ गया उस वक़्त मुझे |अब वो मेरे सामने गिदगिदाने लग गयी की कुछ करो, मुझसे रहा नही जा रहा | अजीब सा हो रहा हें यहाँ पे क्कुह करो जल्दी, मैं अब जादा देर न करते हुए उसकी चुत पे लंड रखा और धक्का दिया, उसकी चुत एक दम कसी कुंवारी चुत थी | घुसाड़ने मै बहुत म्हणत लगा और उसे दर्द भी बहुत हुआ | वो तो फुट फुट के रोने लग गयी उस वक़्त | मेने उसके होतो पे अपना होठ रख दिया और निचे आराम आराम से काम चालू रखा | वो काफी देर तक तदपि दर्द के कारण पर कुछ देर के बाद शांत हो गयी | तब भी मेने निचे का काम चालू रखा और फिर धीरे से उसके होठो के उपर से आपने होठ को हटा लिया और उसके चूचो को चूसने लग गया | अब उसे काफी मज़ा आ रहा था जो उसके चेहरे से साफ़ झलक रहा था |  वो अब अपनी बालो को सम्भाल रही थी और उफ़ ह्म्म्मम्म्म्म उ उ उ उ  य्स्सस्स्स्स ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह किये जा रही थी | उसके साथ साथ मुझे भी काफी मज़ा आ रहा था | इतना मज़ा न मुझे आजतक कभी मिला और न ही उसको | हम दोनों तो जेसे स्वर्ग मै उड़ रहे थे इतना मज़ा हम दोनों को आज तक कभी नही मिला जो उस वक़्त हम दोनों ने मिलके हासिल किया | वो मुझे कस के पकड़ ली और अपने तरफ खीचने लगी और कहने लगी जोर जोर से करो जो भी कर रहे हो | वो अब कस कस के कराहने लग गयी और उफ्फफ्फ्फ़ ह्म्म्मम्म किये जा रही थी |कुछ देर के इस मस्त चुदाई के बाद वो बोली की मेरा पानी निकलने वला हें और उस वक़्त तक मेरा भी निकलने वाला ही था | वो बोली की मै आ रही हूँ उफ्फ्फ म्मम्मम्म ऐईईईई और बोलते बलते वो झड़ गयी और उसने मेरे हाथो को ढीला छोड़ दिया और उसी पल मै भी उसी की चुत मै झड़ गया | हम दोनों एक दुसरे से चिपक के सो गये और जब उठे तब हम दोनों ने एक दुसरे को चूमा और फिर मै उसके घर से चला गया |

बुधवार, 13 जनवरी 2016

अंजान लड़के से मेरी चूत चुद गई

अंजान लड़के से मेरी चूत चुद गई
मेरा नाम कविता कपूर है, मैं 22 साल की हूँ, लॉ की स्टूडेंट हूँ। पढ़ाई में होशियार हूँ, अच्छे घर की हूँ, बात पिछले महीने की है, मैंने और मेरी रूम मेट जिया दोनों जालंधर में पी जी रहती थी, सुबह से लेकर रात तक हम दोनों साथ रहती, क्योंकि एक ही क्लास में पढ़ती थी, शाम को एक ही रूम में रहती थी, तो दोनों में बहुत ही अच्छी दोस्ती थी, अब भी है।

करीब दो साल पहले मेरा एक बॉय फ्रेंड था, जिसके साथ मैंने 4-5 बार सेक्स भी किया था, मगर जब मैं डिग्री करने जालंधर आ गई, तो उससे दूर होने के वजह से सिर्फ फोन पे ही दोस्ती रह गई।
मगर जिया का हमारी ही यूनिवर्सिटी के एक लड़के से चक्कर चल पड़ा और दोनों अपनी लव लाईफ एंजॉय कर रहे थे।

जिया अपने यार के साथ जाकर 5-6 बार सेक्स भी कर चुकी थी, जब भी करके आती आकर मुझे बताती कि क्या क्या किया और कैसे कैसे किया, मेरा भी बड़ा मन करता, मगर मेरा तो कोई बॉय फ्रेंड ही नहीं था, और एक के होते दूसरे किसी से यारी लगाने का दिल सा नहीं किया।

खैर ऐसे ही वक़्त निकलता गया।
एक दिन यूनिवर्सिटी से वापिस आई तो शाम का खाना खाकर हम वैसे ही अपने अपने बेड पे लेटी हुई थी, जिया अपने बॉय फ्रेंड से बात कर रही थी, मैं अपने से।
करीब साढ़े नौ बजे तक हम अपने अपने फोन पे बिज़ी रही।

जब फोन पे बात खत्म हुई तो जिया मेरे पास आई और बैठ कर हम दोनों अपने अपने यारों की बात करने लगी। मेरे बॉय फ्रेंड ने भी मुझसे बहुत से सेक्सी सेक्सी बातें की थी, जिस वजह से मेरा मन भी बहुत मचल रहा था।

ऐसे ही बात करते करते जिया ने पूछा- सुन कव, सेक्स करेगी।
मैंने थोड़ा हैरान होते हुये पूछा- सेक्स, और अब?
'हाँ, अब मेरा बॉय फ्रेंड आ रहा है, चुपके से दीवार फांद कर अंदर आएगा।' जिया बोली।
'मगर वो तो तेरा यार है, मैं उससे क्यों करूँ?' मैंने कहा।
'तो तेरे लिए अलग से यार मंगा लूँ, बोल, जस से कह दूँगी, अपने किसी दोस्त को ले आएगा!' जिया ने कहा।

मैंने कहा- अरे तू पागल हो गई है क्या, ऐसे कैसे किसी से भी सेक्स कर लूँगी मैं?
'देख यार जस यहाँ आएगा, मुझसे तेरे सामने मेरे ही बेड पे सेक्स करेगा, देख कर तेरा भी मन मचलेगा, तो क्यों न दोनों सहेलियाँ, एक साथ एंजॉय करें, मैं उधर तू इधर!' जिया ने प्रोपोज़ल रखी।

मैं कुछ सोचने लगी तो जिया फिर बोली- देख दिल तो तेरा भी कर रहा है, अगर लड़का पसंद न आया, तो मत करना अगर पसंद आ गया तो कर लेना, किसको पता चलने वाला है और हमारे सिवा और कौन देख रहा है, क्यों क्या बोलती है?'
जिया ने कहा तो मैंने भी अनमने से हा कर दी- ठीक है, अगर लड़का ठीक ठाक हुआ तो देख लेंगे।

जिया ने अपने बॉय फ्रेंड को फोन पे सब बता दिया।
करीब आधे घंटे बाद, दरवाजे पे दस्तक हुई, जिया ने उठ कर दरवाजा खोला, मैं अपने ही बिस्तर पे बैठी रही, दो लड़के अंदर आए, एक जिया का बॉयफ्रेंड था, जिसे अंदर आते ही जिया ने गले लगा लिया और उस लड़के ने भी जिया के होंठों पे ज़ोर से किस किया।

दूसरा लड़का भी अंदर आया, उसके हाथ कुछ था।
करीब 6 फीट लंबा, गोरा चिट्टा, देखने में भी सुंदर था और स्पोर्ट्समैन लग रहा था।
दोनों के टी शर्ट और बरमूडा ही पहने हुये थे।

जिया और उसका बॉय फ्रेंड तो जिया के बेड पे ही बैठ गए, और दूसरा लड़का कुर्सी पे बैठ गया।

थोड़ी देर जिया और उसका यार आपस में बातें करते रहे, वो लड़का चुपचाप कुर्सी पे बैठा रहा और मैं अपने बेड पे बैठी अपनी फोन पे लगी रही, चाहे मैं कुछ भी नहीं कर रही थी फोन पे, पर मेरा दिल बहुत तेज़ी से धड़क रहा था।

तभी जिया ने मुझे आवाज़ लगाई- अरे कव, वहाँ बैठी क्या कर रही है, इधर आ!
मैं थोड़ा कशमकश में उलझी उठ कर जिया के बेड के पास गई और एक साइड पे बैठ गई, तो जिया ने मेरा इंटरों अपने यार जस और उसके दोस्त दिलजीत से करवाया।

दोनों ने मेरे साथ हाथ मिलाया, जस का हाथ तो ठीक था, मगर दिलजीत का हाथ बहुत सख्त और मजबूत था, उससे हाथ मिलाते हुये मेरे दिल के तार झनझना उठे।
हाथ मिलाने के बाद उस लड़के ने मुझे एक गिफ्ट सा दिया- यह आपके लिए!
मैंने थैंक्स कह कर ले लिया और खोल कर देखा उसमे मेरी ही पसंद के चोकलेट्स थे, शायद जिया ने मेरी पसंद बता दी होगी।

हम दोनों में अभी कोई बात नहीं हुई थी, मगर जिया और जस का प्रोग्राम बन चुका था सो जस बोला- देखो भाई हम यहाँ बातें करने नहीं आए हैं, इस लिए हमारा बेड खाली करो, हमें एंजॉय करने दो और अगर आपने भी एंजॉय करना है तो अपने बेड पे जाओ।

मैं दिल की तरफ देखा तो वो कुर्सी छोड़ के उठ खड़ा हुआ, मैं भी उठी और अपने बेड पे जाकर बैठ गई।
मगर अब बात क्या शुरू करें और कौन शुरू करे।
जस और जिया ने चादर ओढ़ ली और दोनों ने चादर के अंदर खुसर मुसर शुरू कर दी।

फिर दिल (दिलजीत) ही बोला- आपके पास फोन कौन सा है?
मैंने उसे अपना फोन दिखाया।
'ओह गुड!' वो बोला- कौन से गाने फीड हैं इसमें?
मैं उसे अपने फोन पे डाऊनलोड किए हुये गाने दिखने लगी।
'और फिल्में भी हैं क्या?' दिल ने पूछा।
मैंने कहा- नहीं फिल्मे नहीं हैं।
'वटसऐप पे वीडियोज़ तो आती होंगी?' उसने पूछा।
'हाँ आती हैं।' मैंने कहा।

'कौन कौन सी?' उसने फिर पूछा।
मैंने उसे व्हाट्टसप की वीडियोज़ दिखने लगी।
'ये तो बच्चों वाली वीडियोज़ है, कोई बड़ों वाली वीडियो नहीं है क्या?' उसने शरारती अंदाज़ में पूछा।
मैं समझ तो गई मगर सिर्फ न में सर हिला दिया।

'मेरे पास हैं, देखना पसंद करोगी' उसने पूछा।
मतलब साफ था कि वो मुझे सेक्सी वीडियोज़ दिखा कर गरम करना चाह रहा था, जबकि गरम तो मैं पहले से ही थी, बस शर्म का लिहाफ ओढ़े लेटी थी।

मैंने कुछ नहीं कहा, मगर फिर भी उसने ने अपने मोबाइल पे एक सेक्सी वीडियो खोल कर मुझे देखने को दी। मैंने उसका मोबाइल अपने हाथ में पकड़ा और वीडियो देखने लगी, जबकि मन में मैं सोच रही थी 'यार ये क्या दिखा रहा है, तू सीधा ही आकर पकड़ ले मुझे
मैंने कौन सा ना करनी है!
वीडियो में क्या था, एक अंग्रेज़ लड़की को एक अंग्रेज़ लड़का चोद रहा था।

जब 2 एक मिनट की वीडियो मैं देख चुकी तो दिल ने पूछा- कव, क्या मैं भी तुम्हारे साथ आ कर बैठ के ये वीडियो देख सकता हूँ। मतलब साफ था वो मेरे बेड पे बैठना चाहता था, मैंने उसके लिए जगह छोड़ी और बेड पे साइड में होकर बैठ गई।
वो भी मेरे बिल्कुल पास आकर साथ में सट कर बैठ गया।

कोई बढ़िया सा पर्फ्यूम लगा कर आया था, उसका मोबाइल मेरे ही हाथ में था, वो मोबाइल पे अलग अलग वीडियो चला कर दिखा रहा था, कभी कोई कभी कोई, इसी दौरान उसने अपना हाथ मेरे पीछे से घूमा कर मेरे कंधे के पास रख लिया।

एक तरह से मैं उसकी आगोश में आ गई थी, अब जब दोनों मोबाइल पर एक के बाद एक ब्लू फिल्में देख रहे थे, तो मेरा भी ज़्यादा नखरे करने का कोई मतलब नहीं बनता था, मैंने भी उसे इशारा देने के लिए उसके कंधे पर ही अपना सर टिका लिया, सर टिकाते ही उसने मुझे अपनी दोनों बाहों में ऐसे घेर लिया जैसे मैं न जाने कब से उसकी गर्ल फ्रेंड हूँ, खैर मुझे भी इस बात का कोई बुरा नहीं लगा।

जब 2-3 वीडियोज़ हमने देख ली तो दिल ने पूछा- कव, क्या मैं तुम्हें किस कर सकता हूँ?
मैं कुछ न बोली, तो उसने खुद ही मेरी ठोड़ी पकड़ी और मेरा चेहरा ऊपर को उठाया और मेरे होंठों पे एक हल्का सा चुम्बन लिया, मैंने कोई विरोध नहीं किया और उसे आराम से चूम लेने दिया।

मगर उसने एक चुंबन लेकर ही बस नहीं की, एक के बाद दो,तीन बार मेरे होंठों को चूमा और उसके बाद मेरे होंठों को अपने होंठों में ही लेकर चूसने लगा।
मुझे भी बहुत अच्छा लगा, मैं उसी की तरफ घूम गई और उसे अपनी बाहों में भर लिया, वो भी नीचे को सरक गया और मुझे सीधा लेटा कर ऑल्मोस्ट मेरे ऊपर ही चढ़ गया।

मेरे होंठ चूमते चूमते उसने मेरे बूब पे हाथ रखा और बड़े आराम से धीरे धीरे दबाया, पहले एक और फिर दूसरा।
मैं उसे किसिंग में सहयोग देती रही, मज़ा तो मुझे भी आ रहा था, चाहे ये बहुत अजीब लग रहा था कि जिस इंसान को मैं 15 मिनट पहले जानते भी नहीं थी, वो इस वक़्त मेरे बदन से खेल रहा था।

मेरी तरफ से सहयोग देख कर उसने मेरी टी शर्ट के अंदर हाथ डाला पहले मेरी पीठ को सहलाया और फिर हाथ आगे बढ़ा के मेरे बूब्स पे ले आया।
रात को सोते वक़्त मैं ब्रा पेंटी कभी नहीं पहनती सो नीचे से तो नंगी ही थी।

दोनों बूब्स को दबा दबा के मसलने के बाद वो बिल्कुल मेरे ऊपर आ गया, अपने पाँव से उसने मेरे दोनों पाँव अलग किए, अपनी टाँगों से मेरी दोनों टाँगें खोली और खुद को मेरे बीच में एडजस्ट कर लिया।
उसके कड़क लंड को मैं अपनी चूत पे लगा हुआ महसूस कर रही थी।

मेरी टी शर्ट उठा कर उसने मेरे दोनों स्तन बाहर निकाल लिए।
'वाउ, ब्यूटीहुल…' उसने कहा, फिर मेरे दोनों बूब्स को अपने हाथों में पकड़ कर दबाया और फिर बारी बारी से उन्हें चूसा।
न सिर्फ निप्पलों को चूसा बल्कि सारे के सारे बूब को अपनी जीभ से ऐसे चाटा जैसे उन पर शहद लगा हो।

बूब्स चाटने के बाद वो पे आ गया।
पेट और कमर के आस पास उसने खूब चूमा।
लगता था कि बेड कबड्डी का भी अच्छा खिलाड़ी था, हर दांव पेच से अच्छी तरह वाकिफ, कि लड़की को कैसे तड़पाते हैं।

फिर मेरी लोअर उतारने लगा तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया।
'क्या हुआ?' उसने पूछा।
'अभी नहीं!' मैंने कहा।

वो रुक गया, पर उसने अपनी टी शर्ट बरमूडा उतार दिया, नीचे से उसने फ्रेंची पहनी थी, छोटी सी चड्डी उसका लंड संभालने के लिए नाकाफी थी, इसीलिए उसका तना हुआ आधा लंड तो ऊपर से ही चड्डी से बाहर निकला पड़ा था।

मैंने देखा तो हंस पड़ी-अगर इससे बाहर ही रखना है तो पहनने का क्या फायदा?' मैंने कहा तो उसने चड्डी भी उतार के फेंक दी।

6 फुट का जवान, और 7 इंच के करीब उसका लंबा मोटा और काला लंड पूरी तरह से अकड़ा हुआ ऊपर को मुँह उठाए।
आस पास कोई बाल नहीं, शायद आजकल में ही शेव की हो।
हाँ सीने और पेट पर बाल थे, उसे नंगा देखा तो मैं देखती रह गई।
उसने आगे बढ़ कर मेरा लोअर उतारा, इस बार मैंने कोई विरोध नहीं किया। लोअर के नीचे तो मैं नंगी ही थी, मेरी गोरी चिकनी वीट से बाल रहित की साफ चूत को देखा तो बोला- वाह, कितनी प्यारी, कितनी मासूम सी पुस्सी है तुम्हारी, जी करता है खा जाऊँ इसे!

मैं कुछ नहीं बोली, उसने मेरी टाँगें खोली और नीचे आ कर अपना मुँह मेरी चूत से लगा दिया।
जब उसने अपनी खुरदुरी सी जीभ मेरी चूत के अंदर फेरी तो मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए, मैं कसमसा उठी, कभी इस तरफ को पलटी मारूँ कभी उस तरफ को मगर उसने अपना मुँह मेरी चूत से नहीं हटाया।

आखिर मैं भी कब तक तड़पती मैंने भी हाथ बढ़ा कर उसका लंड पकड़ लिया।
उसने मेरी चूत छोड़ी, मेरी दोनों टाँगे खींच कर मुझे नीचे को खिसकाया और मेरी बगल में उल्टा हो कर लेट गया उसने फिर से मेरी टाँगे खोल कर अपना मुँह मेरी चूत से लगा दिया और मेरी चूत चाटने लगा, तो मैंने भी उसका लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।

थोड़ी देर ऐसे ही चाटने के बाद उसने मुझे अपनी बाहों के ज़ोर से घूमा कर ऊपर कर लिया।
अब वो मेरे नीचे था और मैं ऊपर !
मेरी चूत से लेकर गाँड तक वो सब कुछ चाट गया।
ज़िंदगी में पहली बार किसी ने गान्ड को चाटा था, एक सिरे से दूसरे सिरे तक वो अपनी जीभ से चाट रहा था।

मैंने भी उसका लंड और आँड वगैरह सब कुछ अपनी मुँह में लेकर चूस गई।
सच में साले ने बहुत मज़ा दिया।

दूसरे बेड पे क्या हो रहा था, हमें कुछ पता नहीं, न ही हमने उधर देखा, हम तो अपने ही मज़े में खोये थे।
जब चूसा चासी काफी हो गई, तो दिल ने पूछा- अब आगे बढ़ें?

मैं भी हाँ कह दी। उसने मुझे बेड बीचों बीच लेटाया और खुद भी मेरे ऊपर आ गया।
मैंने खुद अपनी टाँगे खोल कर उसके लंड का स्वागत किया।
मेरे ऊपर लेट कर उसने अपनी बाहें मेरे नीचे से निकाल कर मुझे अपनी आगोश में कैद कर लिया, फिर मेरे होंठों को चूसते हुये उसने अपना लंड मेरी चूत पे रगड़ना चालू किया।
सच में लंड की रगड़ से मेरी चूत में बहुत मज़ा आ रहा था और ऐसे ही रगड़ते रगड़ते अचानक उसने अपना लंड मेरी चूत के अंदर घुसा दिया।

चूत तो पहले सी गीली थी, सो एक बार में ही उसके लंड का टोपा अंदर घुस गया, मैं थोड़ा सा हिली- क्या हुआ, ठीक है?
दिल ने पूछा।

मैंने कहा- हाँ ठीक है।
तो दिल ने मेरी आँखों में देखते हुये बाकी का लंड भी मेरी चूत में घुसा दिया।
जब उसका पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया तो उसने बड़े ही आहिस्ता से अपना लंड आगे पीछे चलाना शुरू किया।
सेक्स तो मैंने अपने बॉय फ्रेंड से भी किया था, वो भी बहुत अच्छा था, मगर इसके सेक्स करने का अंदाज़ कुछ जुदा था, हर स्ट्रोक के साथ जैसे वो मेरे चेहरे के भाव पढ़ने की कोशिश करता कि कहीं मुझे कोई तकलीफ तो नहीं हो रही, वैसे भी उसने अपनी स्पीड स्लो ही रखी मगर निरंतरता बरकरार थी।

मोटा होने की वजह से उसका लंड मेरी चूत की सभी दीवारों से रगड़ के चल रहा था और मेरी चूत के कोने कोने की खुजली शांत हो रही थी।
करीब 5 मिनट उसने बड़े आराम से किया, मगर अब मेरा होने की कगार पर था, सो मैंने कहा-अब धीरे धीरे नहीं, ज़ोर ज़ोर से करो, एकदम तेज़!
मैंने तो कह दिया, मगर उसके बाद उसने जो अपनी ताकत जो जोश दिखाया मेरे तो होश ही उड़ गए, मेरे तो जिस्म के अंजर पंजर हिल गए।
क्या ज़ोर था साले में!

अगले एक मिनट में ही मेरा तो पानी छुट गया, मैं नीचे तड़प रही हूँ, स्खलित हो रही हूँ, क्या हो रही हूँ, फिर उसने इस बात की परवाह नहीं की।
जो चोदा जो चोदा, बस पूछो ही मत! कभी मेरे बूब्स पे काट खाता, कभी मुँह में जीभ डालता, कभी गालों को मुँह में लेकर चूसता, बस समझो कि खा गया मेरे को।

और अगले 15 मिनट उसने मेरे साथ ऐसे ही ज़बरदस्त चुदाई की।
उसकी एक चुदाई में मैं 2 बार डिस्चार्ज हो गई।
चूत तो ऐसे हो गई थी जैसे किसी ने सैंड पेपर लेकर रगड़ दी हो, अंदर तक छिली पड़ी थी।

जब उसका डिस्चार्ज होने वाला था, तब उसने कहा, 'कव मेरा होने वाला है, कहा करूँ?
'कहाँ मतलब, बाहर करो, प्रेग्नेंट नहीं होना मुझे!' मैंने कहा।
'मुँह में लोगी?' उसने पूछा।

मुझे तो डर लगा कि यह मेरा मुँह फाड़ देगा, मैंने कहा- नहीं बस बाहर कर दो।

उसके बाद के जो आखरी धक्के उसने मारे, वो तो ऐसे थे, जैसे वो अपना लंड मेरी चूत में डाल कर मेरे मुँह से बाहर निकाल देना चाहता हो, मेरी तो आँखों से भी पानी आ गया।
और फिर उसने चोदते चोदते एकदम से अपना लंड बाहर निकाला और उसके लंड से वीर्य की पिचकारियाँ निकल पड़ी, मेरा पेट, छाती, मुँह सब गंदा कर दिया उसने।
कितना माल छुड़वाया उसने।
मैं तो सारी की सारी गंदी हो गई।

और वो भी जब निढाल हुआ तो बेड से ही नीचे गिर गया और वहीं पे लेट गया।
उसे नीचे गिरा देख कर जस और जिया भी उठ कर हमारे पास आ गए।

वो दोनों भी बिल्कुल नंगे थे, मुझे उनके पास आने पे शर्म आई मगर मैं इस हालत में ही नहीं थी कि उठ कर अपने कपड़े पहनती, या खुद को ढकती।

'वाह, दिल क्या शानदार चुदाई की तूने तो!' जिया बोली।
दिल ने नीचे लेटे लेटे कहा- तुमको करवानी है क्या?
जिया तो चुप रही, शायद उसके दिल में हाँ थी, मगर उसका बॉय फ्रेंड बोल पड़ा- हाँ हाँ, मुझसे भी कह रही थी कि दिल ने कव की माँ चोद दी, अब ऐसा कर तू इसकी भी माँ चोद दे।

जिया ने उसके एक हल्का सा घूंसा मारा प्यार में, दिल नीचे लेटे लेटे बोला- थोड़ा रुक जा, सांस लेने दे, फिर देखना, इसके सारे खानदान को न चोद डालूँ तो कहना।
जिया ने मुझसे पूछा- कव तू ठीक है?
मैंने साइड पे पड़ी चादर उठाई और उसे ओढ़ कर करवट लेकर लेट गई- हाँ मैं ठीक हूँ, थक गई हूँ, अब सोना चाहती हूँ।

उसके बाद लेटे लेटे मुझे कब नींद आ गई, पता ही नहीं चला।
अगले दिन सुबह 10 बजे के करीब आँख खुली, देखा तो जिया अपने बेड पे बिल्कुल नंगी लेटी सो रही थी।
मैंने उठ कर अपने कपड़े पहने और जिया को भी जगाया।

चाय पीते पीते जिया ने बताया- रात साढ़े 3 बजे दोनों गए, तुम तो सो गई, तुम्हारे बाद, पहले दिल ने और फिर जस ने एक बार और मेरे साथ सेक्स किया। सच में दिलजीत में तो जान ही बहुत है, जस भी ठीक है, मगर दिलजीत के सामने वो कुछ नहीं, मैंने साफ साफ जस से कह दिया, अगली बार आए तो अकेला नहीं आए, दिलजीत को साथ लाये।

मैंने उसे टोका- अरे नहीं, मुझे नहीं करना और!
चाहे मेरा दिल चाह रहा था कि दिलजीत ज़रूर आए।
तो जिया बोली- अरी बहनचोद तेरे लिए नहीं, मैं तो अपने लिए कह रही हूँ।
'अच्छा तो मेरे बॉय फ्रेंड पे अब तेरी नीयत खराब हो गई कमीनी?' मैंने हंस कर कहा।
तो जिया बोली- अरे काहे के बॉय फ़्रेंड्स, उनको भी पता है, हमने देनी है, हमें भी पता है उन सालों ने लेनी है, तो ये तो लेन देन है, कोई पक्का वादा नहीं, जब तक है चूत में दम, एंजॉय करेंगे हम।

रविवार, 10 जनवरी 2016

प्रिया सक्सैना कि चुत कि चुदाई स्कुल मेँ

प्रिया सक्सैना कि चुत कि चुदाई स्कुल मेँ
मेरा नाम विनीत है, मेरी उमर 18 बर्ष है बात पिछले बर्ष की हे जब मे उस समय इण्टर मे था मेरा लण्ड 5इंच लम्बा है और प्रिया मेरी ही क्लास मे पढती थी उसका 0साईज बहुत ही मदहोश कर देता था और उसके होँठ तो गुलाबी-2 थे, मेरा तो मन पहले से ही उसे चोदने को करता था और मै तो रोजाना ही स्कुल जल्दी जाता था तो वो उस दिन स्कुल जल्दी आ गयी थी उसने मुझसे केमेस्ट्री  कि बुक मांगी तो मैने उसे बुक दे दीँ लेकिन मेरी उस बुक मे कामसूत्र की बुक थी मैं ये भुल गया था अगले दिन वो फिर स्कुल जल्दी आ गयी  समझ नही पाया कि उसे कामसुत्र वाली किताब मिल गयी थी जब उसने मुझे केमेस्ट्री  कि बुक दि तो उसने मेरी तरफ घुर के मेरे लण्ड के उभार को पेण्ट पे देखने लगी तो मैने उससे कहा तुम्हारा काम हो गया वो एकदम वोली कि तुम्हारी एक और बुक मेरे पास है तब मेरे समझ आया कि वो क्या कहना चाहती थी मैने भी पुछ लिया कौन सी बुक तो वो शरमा कर मुँह नीचे कर लिया तभी कुछ क्लासमेट आ जाने के कारण बात आगे ना बढ सकि।
मैँ कल फिर ओर जल्दी स्कुल आ गया,तो मैने देखा की प्रिया मेरी उस बुक को अपनी चुची पर रख चुत मसल रही थी मैँने हिम्मत कर उसके मम्मो को दबोच लिया उसने मुझे देखकर बोला मे  तुम्हारा ही इंतजार कर रही थी
इतनी देर मे मैने उसकी सलबार का नाड़ा खोल उसकी चुत मे ऊंगली डाल दी उसने पेण्टी नहीँ पहनी थी कितनी नरम,कोमल और ताजी चुत थी तभी उसके मुँह से हल्की सी चीख निकलि मैने देखा वो झड़ गयी थी मैने उसका एक मम्मा लेके चुसने लगा और वो मेरी पेण्ट उतार के लण्ड को हिलाने लगी ओर कहने लगी मुझे चोद विनीत चोद डाल फाड़ डाल मेरी चुत को मैने तुरन्त सलबार नीचे कि ओर अपने लण्ड के टोपे को चुत के छेद से सटाकर एक हल्का धक्का मारा  बो चिल्लाई अआअइईआईआआआ ..,………………………..फट गयी मैने देखा मेरा आधा लण्ड ही घुसा था मैँने फिर जल्दी एक सोट तेजी से लगाया वो चिल्लाती मैने पहले ही ऊसके होँठो को अपने होँठो से चुसने लगा वास्तव मे उसके होँठ बहुत नशीले थे मै करीब 15-20 मिनट बाद झड़ने बाला था मैने लण्ड बाहर निकाला तो वो मेरा सारा पानी पी गयी वो इस बीच दो बार झड़ गयी थी मैने उसकी चुत देखी तो उससे खुन निकल रहा था मैँने अपने रूमाल से साफ कर उसे फ्रेश होने के लिए कहा तो जब वो उठि तो लड़खड़ा कर फ्रेश होने गयी उस दिन के बाद हम दोनो ने 4-5 बार सेक्स किया फिर वो इण्टर करके बम्बई अपने फुफा के चली गयीँ थी।

बुधवार, 10 अप्रैल 2013

कॉलेज की देसी लड़की की जवान चुत

कॉलेज की देसी लड़की की जवान चुत
आज आपको अपने एक अपने सीनियर देसी लड़की की चुदाई सुनाने जा रहा हूँ | मैं उन दिनों मैंने इंजीनियरिंग कॉलेज के ३ वर्ष में था और वो दीदी चौथे वर्ष में थी | मैं तो उन दिनों अपने साथ की लड़कियों से भी बात नहीं करता था पर कुछ किताबों के चक्कर में उन दीदी से करनी पड़ गयी बात | मैं जहाँ तक जानता हूँ उनके साथ कई लड़के दीदी पर मरते थे पर वो भी इतनी जल्दी किसी से पट भी नहीं रही थी | जब पहली बार मुलाक़ात हुई तो मैं उनके गोरों हाथों को छूने के लिए तडप रहा था और उनकी मध्ह्म हंसी पर तो मारा ही जाऊं | बस अब शायद दीदी को भी मेरे अंदर कोई खूबी पसंद आ गयी और जबव भी मेरी क्लास खत्म होती तो वो मुझे मिल जाया करती और बस ऐसे ही बतियाते हुए मेरे साथ बस स्टॉप तक चल दिया करती थी |
मैं रोज रात को उनके ही बारे में सोच कर अपने लंड को मसला करता था और जब मन हद्द से पार होने लगा तो एक दिन जब हम बस स्टॉप पर बात कर रहे थे मैंने उन्हें मेरे साथ कहीं घूमने जाने की बात कर दी | हम एक जगह किसी अनजाने इलाके में उतरे और ऐसी ही वहीँ पठार के इलाके में चलते हुए बात करने लगे और मैंने देखा की वहाँ दूर दूर तक सन्नाटा ही था और कहीं था भी नहीं | हम वहीँ बैठकर बात करने लगे और मेरा रोमांस का कीड़ा भी जागने लगा | हम बातों में मग्न हो रहे थे और मैं अपनी उँगलियाँ उनकी जाँघों पर लहराने लगा | बीएस अब दीदी भी रोमांस के परवान चढ गयी और हम एक दूसरे को चुमते हुए बेसबर हो गए | मैंने दीदी के टॉप के अंदर हाथ डाल चुचों को दबाने लगा |  मैं अब पूरी तरह तन गया और उन देसी लड़की,  दीदी टॉप को उतार दिया और उनके चुचों को मुंह से पीने लगा |
चुदाई का मन अब जोर देने लगा तो मैंने उनकी पैंट को उतार दिया और उनकी चुत में ऊँगली करने लगा जिसपर वो बार गरम हो उठी थी बिलकुल चुदाई के लिए तैयार | अब मैंने अपने लंड को देसी लड़की की चुत का रास्ता दिखा दिया था जसिमें मेरा लंड बिना रोके बस चुदाई की छप्प – छप्प आवाजें निकाले जा रहा था | हमें अब कामुकता का असली मज़ा आ रहा था | मैंने अब दीदी को अपने उप्पर बिठा लिया और नीचे से अपने लंड को देने लगा जिससे हम अब खूब मज़े में सिंहर रहे थे | मैं दीदी की चुत से में दुब चूका था और अपने लंड के आखिरी के झटकों में वहीँ चुत मुहाने पर मसलने लगा और सारा मुठ का मुठ निकल पड़ा | दीदी अब भी गहरी लंबी सांसें भारती हुई अपनी मद्धम नज़रों से मुझ पर प्यार बरसा रही थी और मुझे भी चुदाई का गर्व महसूस हो रहा था की मैंने एक जवान गोरी चुत मारी जिसे कोई पटाने के बारे में भी नहीं सोच पा रहा था |

रानी की इंडियन गरमा गर्म चुदाई

रानी की इंडियन गरमा गर्म चुदाई
दोस्तों रानी मेरी एक सहेली की कॉलेज की इंडियन गरमा गर्म चुदाई का बड़े ही विस्तार से कांड आप सभी को सुनाने जा रहा हूँ | रानी अपने व्यहवार में सीढ़ी साधी ही थी पर शायद मैं ही उसकी जिंदगी का वो लड़का था जिसने उसकी कट में चुदाई का जोश कूट – कूट के भर चूका था अब | दोस्तों मैं आपको बता दूँ की मैं काफे लंबे समय से ही इन्टरनेट पर सेक्स कहानियाँ पढता हूँ और इसीलिए मेरे दोस्तों को बस यह लगता है की मैं कंप्यूटर के बारे में बहुत कुछ जानता हूँ जबकि मुझे कुछ आता जाता ही नहीं है | यही वजह थी की मैं रानी से मिला | हुआ यूँ की दोस्तों एक दिन मेरी सहेली ने मुझे बताया की उसकी एक सहेली को नेट पर कुछ काम करना है कंप्यूटर का और मैं उसकी मदद करूँ |
मैंने भी उसकी बात सुन एक बार हाँ कर दी और उसकी सहेली यानी रानी को शाम को मेरे घर भेजने की बात कह दी | शाम को जब रानी मेरे घर पे आई तो दोस्तों उसका तंग बदन देखने ही लायक था | ससुरी ने काला बिन बाजू वाला टॉप पहना हुआ था और नीचे एक कसी हुई पैंट | हमारी वो पहली मुलाक़ात और पहली व् आखिर चुदाई का दिन था | वो आये और हम दोनों एक दसरे से परिचित होते हुए बस बैठ अपना काम करने लगे | मुझसे पर कतई भी रुका न गया तो मैंने हौले – हौले उसके हाथ को सहलाना शुरू कर दिया जिससे रानी गरम होने लगी थी जब उसने कुछ नहीं कहा तो मैं बस सब कुछ भूल उसे चूमने लगा और वो भी अब मुझे सहयोग करते उए होंठ चूसने में खो गयी |
वो कुर्सी पर बैठी हुई थी और मैंने उसके कंधे दबाते हुए प्यार से उसके टॉप को खींच उतार दिया और नंगे मोटे चुचों को दबाने लगा और फिर आगे से मुंह भरकर चूसने लगा | मैंने अब वहीँ नीचे उसे लेटा लिया और प्यारा से उसके कपडे उतार नंगी कर दिया | मैं रानी की चुत की फांकों में ऊँगली भी करने लगा और भी ज़ोरों से अपनी  अपनी उंगलियां अंदर बहार करने लगा | जब मैंने ध्यान दिया की रानी बिलकुल बेसुध हो चुकी है तो मैंने उसकी चुत पर अपना काला लंड टिका दिया और झट से धक्का मारना शुरू कर दिया | रानी को दर्द हो रहा था पर मेरे सर पर चुदाई का ऐसा भुत सवार था की किसी की भी परवाह नहीं थी |
मैं रानी के उप्पर चढ़कर चोदे जा रहा था और उसकी उसकी चुत से खून भी निकल रहा था | वो जब चींखें लग तो मैंने रहत की सांस ली अपने लंड को निकाल और कुछ देर उसे सहलाते हुए उसकी चुत का खून साफ़ किया | जब वो उसकी चुत फिर से अब चुदाई के मुझे तैयार लगने लगी तो मैंने धक्के पलते हुए इंडियन गरमा गर्म चुदाई शुरू कर दी और वो आँखें मीचे आःह्ह आहाहह्हा जानू चोद मुझे . .!! कहकर सीत्कारें भर रही थी | इस बार उसकी चुत से खून नहीं बल्कि कामरस की मलाई बह रही थी | उस दिन के बाद चुदाई खत्म होते ही वो मेरे घर से भाग गयी और आज तक कभी मेरे सामने नहीं आई |

कामक्रीडा की कहानी में दिलचस्पी बढाई

कामक्रीडा की कहानी में दिलचस्पी बढाई
दोस्तों आज मैं सोफिया की की कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो मेरे ही चौथे वर्षीय कॉलेज की लड़की थी और मैं उसकी बहुत जल्दी गरम करने वाला था | हमारे प्रेम – सम्बन्ध के दौरान मैं उससे रोमांटिक बातें करता तो बस वो फिसल जाया करती थी और मुझे अपना दिल दे बैठी थी | मैंने अब अपनी प्यास भुजाने के लिए अक्सर उसके साथ कॉलेज के बाद चुम्मा – चाटी भी कर लिया करता था | मुझे अब उसके पूरे बदन को अपने नीचे नंगे देखने की तलब सी होने लगती | मैं उसे चुम्मा – चाटी तो खूब कर लेता था पर जब बात चुचों से नीचे पहुँचने की आती तो वो मुझे रोक लिया करती | मैं भी कौन सा इतनी ज़ल्दी माने वाला था और अब जब भी मै उससे चुम्मा – चाटी कर रह होता था तो उसकी चुन्नी के नीचे से चुचों को दबा लेता और कभी उसकी कुर्ती के अंदर हाथ डाल उसके चूचकों के साथ खेलता |
एक दिन मैं सोफिया को अपने साथ कॉलेज के बाद बहार ले गया और और एक सुनसान इलाके में वहाँ उसके साथ पहुँच गया | वो हलकी सी चौंक गयी थी तभी मैंने अपनी तरफ खीच बाहों में भरके उसे चूमने लगा | उसे भी आज मेरी किसी भी हरकत से कोई इनकार ना था | मैंने बा खूब मस्त – मौला होते हुए उसकी कुर्ती खोल दिया और साथ ही ब्रा का भी हुक खोल हटा दिया | उसके नंगे मस्ताने चुचों को अब मैं चूसते हुए उससे खूब गरम कर दिया और मैंने कुछ देर बाद सोफिया को वहीँ धरती पर लिटा दिया | अब मैंने उसके बाजू में लेटते हुए उसकी नीचे की सलवार खोल दी इससे पहले मैं ऊँगली करता, देखा की उसकी चुत पहले से इतनी चिकनी थी |अब मैं सोफिया की बेताबी को समझता हुआ अपनी जीभ उसकी चुत की फांक के बीच घुमाके चाटने लगा जिससे बस अपने होठों को मिस्मिसाते हुए मुझे मानसिक सहयोग कर रही थी |
मैंने अब ज्यादा वक्त बर्बाद ना करते हुए उसकी टांग को चौड़ाते हुए अपने लंड को निकाल उसकी चुत की फांकों के बीच मसलते हुए उसके उप्पर चढ उसके होठों को चूसने लगा | मैंने कुछ देर बाद ही अब उसकी चुत में पूरा दम लगाते हुए अंदर देने के लिए झटका मारना शुरू कर दिया और कुछ ही देर में मैं उसकी गीली चुत के मज़े ले रहा था | मेरी इतने देर उसकी चुत के साथ खिलवाड़ करने बाद उसे दर्द अब काम हो रहा था और वो मेरे झटके भी सहने लायक हो गयी थी | मैं सोफिया के बदन पर पर अब चढकर अपने लंड को अपने हाथ से ही मसल रहा था | वो देख रही थी की मैं क्या कर रहा हूँ इतने में ही मेरे लंड ने अपनी जोर की पिचकारी छोड़ दी सो सीधा उसके मुंह पर जाकर ही गिरी | उस दिन से आज अलक सोफिया मेरे लंड को इसी तरह अपनी चुत में पिलवाती है | अब तो काम – क्रीडा की कहानी में मुझे अपने से ज्यादा सोफिया की दिलचस्पी नज़र आती है |

देसी सेक्स – एमबीए कालेज में

देसी सेक्स – एमबीए कालेज में
एमबीए मतलब मास्टर आफ़ बैड आर्ट्स- गंदी हरकतों के विशेष जानकार। यह देसी सेक्स की कहानी सचमुच  की है जो मेरे साथ हुई। उन दिनो मैं एमबीए मे पढा करता था। ह्मारे बैच में एक सपना ना म की लड़की थी जो पहाड़ी थी। वो कम बोलती थी और इसलिए लड़के उसकी हेल्प नही करते थे। मैंने उसे पटाने के बारे में सोचा क्योंकि उसकी नमकीन जवानी मुझे दीवानी कर चुकी थी। धीरे धीरे मैंने उसे पटा लिया और मुझे पता चला कि वह पहले से किसी लड़के को सीरियसली प्यार करती है। अब मेरा काम कठिन हो गया था। उन दिनों कालेज में सर्वे का काम मिला हुआ था। हमारे ग्रुप में चार लड़के थे और दो लड़कियां। उन दो में से एक मेरी सपना थी और बाकि एक कर्तिका। सर्वे के लिए हमें लंबे टूर पर जाना था। हल्की ठंड थी। स्कार्पिओ गाड़ी कालेज की तरफ़ से मंगाई गई और हम सब बैठ गए। हम और सपना पीछे डिग्गी में बैठ गए और गाड़ी चल दी।
अन्धेरा होते ही ठंड लगने लगी और सपना ने अपनी चादर मुझे ओढा दी। मेरे लंड में सनसनी पहले से मची हुई थी। साम्ने वाली सीट पर एक लड़का अंमित बैठा हुआ था। इस लिए मैं संभल के कुछ कर रहा था। चादर के अंदर ही मैंने पूनम का हाथ पकड़ लिया वो बहुत गरम था और उसे मेरे ठँडे हाथ बहुत पसंद थे। उसने कुछ नही बोला तो मैंने उसका हाथ पकड़े पकड़े अपने लंड के उपर जीन्स पर ले आके रख दिया और उपर से दबाने लगा जिससे मेरे लंड को वह महसूस कर सके। वह दबा रही थी और मेरे लंड में खून का दबाव बढ़ता जा रहा था। मैंने जीन्स खोली और लंड निकाल कर उसके हाथ में पकड़ा दिया। सामने वाला लड़का अब भी उंघ रहा था और वह जानता था कि वो मेरी माल है। सपना ने मेरा लंड पकड़ कर चादर के अंदर ही सहलाना शुरु कर दिया लेकिन बहुत सावधानी से जिससे कि आगे और सामने की सीट पर बैठे लड़के और लड़किया जान न सकें।
खैर सफ़र खत्म हुआ। हम सब वापस कालेज आए। अब मुझे उसे कालेज में ही चोदना था। कम्प्यूटर लैब उसके लिए सही जगह थी और  मैंने सपना को बुलाया कुछ काम करने के बहाने से। शाम का वक्त था मैंने थोड़ी दारु भी पी रखी थी। वह अपना लैपी लेकर आयी और उसने लौंग स्कर्ट पहन रखी थी और उपर में ब्लू कलर की टाइट टी शर्ट्। मैं ने आज उसकी जवानी का मजा चख्ने का मूड बना लिया था। वह आकर मेरे बगल वाली चेयर पर बैठ गई। उसकी सांसे पहले से गरम थीं। मैंने उसे फ़िर अपना लंड पकड़ा दिया जिसे उसने बेहिचक पकड़ लिआ और मूठ मारने लगी। मैं नीचे हाथ डालकर उसकी स्कर्ट में अपनी उंगलिया फ़िराने लगा। उसकी सांसे और तेज हो रही थी। फ़िर मैंने दो उंगलियां उसकी चूत में डाल दी और उसके होठो को अपने होठो से जाम कर लिया। मैं चूत पर दबाव बढाता गया और वो मेरे होठ लगभग चबा जाने वाली थी।
उस्ने चूस कर खून निकाल दिया। वाकई वो गरम थी। अब मैंने उसकी टीशर्ट का गला नीचे खीच दिया और ब्रा खोल दी। उसकी गोरी गोरी गोल गोल दूधिया चूंचियां मेरे सामने थी मैने एक हाथ से चूत में उंगली करनी जारी रखी, दूसरे हाथ से निप्प्ल मसलना और मुंह से एक चूंचि चूसने लगा। वह कह रही थी और चूसो और करो। मैं उंगली करता रहा और चूचिया चूसता रहा अचानक वह आह आह करके रुक गई शायद वह आर्गज्म पा चुकी थी। मैंने जब हाथ बाहर खीचा तो उसमें लसलसा सा गाढ़ा उजला पदार्थ लगा हुआ था जिससे तीखी खूश्बू आ रही थी। मैंने उस चखा तो वह नमकीन था। मैंने वह सपना के चूचो पर मल दिया। अब मैने अपना लंड उसकी चूचियो पर रगड़ना शुरु कर दिया और वह नीचे बैठ गई उसने मेरा लंड अपने मुह मे ले लिआ और चूसने लगी। उसके छोटे से मुह मे मेरा लंड घुस भी नही रहा था। मैंने अब उसे कम्पूटर डेस्क के सहारे झुका दिया और पीछे से उसकी गाँड मे एक उंगली कर दी उसने कभी इसका अनुभव नही किया था वो गुस्सा हो गई।
मैंने अपना लड उसकी चूत के मुहाने पर रखा और धक्का देने लगा। आधा लंड घुसते ही वह कराहने लगी। शायद उसके बायफ़्रेंड का लंड मेरे जितना बड़ा नही था(7 इंच) और लगभग गधे जितना मोटा। मेरा काला लँड उस एमबीए गोरी चूत में घुसने लगा और वह सिस्कारिया मारने लगी। थोडी देर बाद मैने उसे दीवाल से सटा कर खड़ा कर दिया और सामने से पेलने लगा। उसके चूचे मेरे सीने से टकरा रहे थे और होठ मेरे होठो को जाम किए हुए थे। तभी मैंने उसे उपर उठा लिया और डेस्क पर बैठा दिया। अपनी नाक उसके चूत में घुसा दी और गांड चाटने लगा। वह बिल्कुल गीली हो चुकी थी और उसकी चूत से पानी निकल गया। मैंने इस कामरस का स्वाद ले लिया। हमारी चुदाई पूरे एमबीए चलती रही।

शराब के साथ चढा वासना का भी नशा

शराब के साथ चढा वासना का भी नशा
नमस्कार दोस्तों,
आज मैं अपनी सहेली की कहानी सुनाने जा रहा हूँ जिकी मैंने मजेदार पार्टी के बाद चुत मारी थी और फिर आज तक मारता हुआ अ रहा हूँ | दोस्तों उससे मेरी पहली मुलकात अपने कॉलेज में हुई थी और उसके बाद हम अच्छे दोस्त बन गए थे | वैसे तो मैंने उसके बारे में कभी गलत या वासना भरा विचार नहीं लाया पर पार्टी के नशे के बाद सब कुछ जैसे एक बार में ही हो गया था | उस दिन के बाद से मैं आज तक उसकी वासना भरी चुत मिएँ डुबकियां लगात हुआ आ रहा हूँ | हम लोग पार्टी मनाने के लिए अपने कॉलेज की छुट्टी के बाद बार में गए हुए थे जिसमें मैंने और वर्तिका ने ही कुछ ज्यादा शराब पी ली थी और अब जब मैं उससे कभी भी छू रहा था तो मेरे मन में उसकी चुत के साथ खिलवाड़ करने का का मन का रहा था और मैंने पीछे नहीं हटा | मैंने चुपके से उसे बीच पार्टी में आदर के बाथरूम में ले आया और उसके मस्त वाले तन को देख बेसबर होते हुए पगला गया |
मैंने मजबूरन वर्तिका के हाथ को सहलाते हुए उसके चुचों को छूना फिर अपनी बाहों में भरते हुए चूमना शुरू कर दिया जिसपर वर्तिका ने भी मेरा किसी भी तरह से विरोध नहीं किया और मैंने उसके होठों को चूसते हुए अपने होठो के तले दबाते हुए उसके को सहलाते दबाकर मज़ा ले रह था | हम दोनों अब एक साथ शर्ब और वासना के नशा में चकरा चुके थे और मैंने उसके टॉप को उतार दिया साथ ही उसके नंगे चुचों को मसलते हुए पिने लगा | मुझे कुछ डर ना था की वहाँ पर कोई आ भी सकता है बस मस्त होकर वर्तिका के सारे कपड़ों को उतार दिया और उसके उप्पर चढ गया | मैंने वक्त का पूरा फाइदा उठाते हुए अपने लंड को निकाला और उसकी टांगों के बीच चुत पर टिका दिया | वर्तिका भी अब मेरे लंड को उसकी चुत में देने के लिए जिद्द भरने लगी जिसपर मैंने बस जोर के धक्के मारना शुरू कर दिया और वो नशे में दर्द में जूझती हुई अपनी चुत को चुदवाने के लिए गांड को मटकाने लगी |
मैंने भी अब किसी की भी चिंता ना करते हुए उसकी चुत को बस चोदे जा रहा था रहा था जिसपर उसकी सिस्कारियां निकल रही थी | मैंने वर्तिका की पर थप्पड़ मारते हुए उसकी टांगों उठात हुए मेरे लंड को देने लगा | मेरा सामने जैसे उसकी चुत का भुत बैठ चूका था और मैंने उसकी गांड के छेद में भी ऊँगली करते हुए अपने लंड के ज़ोरदार ढाके मारे जिसपर उसकी आह निकालनी कतई भी बंद नहीं हुई | वो अब भी अपनी चुत के दर्द को लेकर बेतहाशा तरीके से तडप रही थे और मैं जोरदार झटकों से साथ ही उसके उप्पर झड गया | मैंने वर्तिका की चुत पर अपने मुठ गिराकर वहीँ उसकी चुत को चाटने लगा जिसमें अब शराब से भी ज्यादा नशा था | जब वहाँ कुछ देर यूँही चुसम – चुसाई करते हुए अपना होश आया तो मैं चौक गया और उस दिन के बाद से मैंने उस वर्तिका की चुत को कभी अपने लंड से अलग नहीं किया |

कॉलेज की मस्त गांड मारी बेंच पर

कॉलेज की मस्त गांड मारी बेंच पर
नमस्कार दोस्तों,
आज मैं आपको नमर्दा की बेरुखी चुत के साथ अपने दीवानापन को बांटने जा रहा हूँ और आप भी खूब मज़े लेंगे जितनी की मेरी उसके जिस्म के साथ दीवानगी है | मैं अक्सर तो किसी भी लड़की की चुत के लिए इतना नहीं मारा जितना की उसके चुत के लिए अपना सुख – चैक खो बैठा | नमर्दा मेरे कॉलेज में पड़ा करती थी और वो जब भी जींस पहन कर कॉलेज में आया करती थी तो दोस्तों उसकी खूबसूरती देखने लायक होती थी पर मैं अक्सर ही उसे पीछे से देखना सही समझता था क्यूंकि जब वो उस कासी हुई जींस में चला करती थी तो उसकी मटकती हुई गांड मेरे लंड को भा जाया करती थी | मैंने उसे अब कीस भी तरह अपनी आहोश में ले लेना चाहता था | मैंने कॉलेज के समय के बाद कभी किताबों तो कभी उधर – इधर के विषय पर बात करना शुरू कर दिया जिसपर वो भी मेरे साथ आपत्ति नहीं जाताती और कुछ ही समय में मैंने उसके दिला पर भी मस्त मज़े में काबू कर लिया था |
एक दो दिन में ही हमारी मुलाकातों का समय बढ़ता चला गया | मैंने अब कभी कभार उसे कामुक मुस्कान देते हुए उसकी गांड की तरफ बड़ी लचीली ढंग से देखा करता जिसपर वो भी समझ गयी की मैं उसकी गांड का दीवाना हो चूका हूँ | कुछ ही दिनों में मैंने उसके हाथ को थामना भी शरू कर दिया और अब जब कोई पास ना होता तो मैंने उसे अपने गले से चिपका भी लिया करता | एक दिन जब मुझे मौका कुछ ज्यादा ही रंगीन लगा तो मैं वहीँ वरांडे में खड़े होकर उसके चुचों को टॉप के उप्पर से ही दबा रहा था | अब जब उसे भी खूब जमकर मज़ा आने लगा तो मैंने धीरे – धीरे उसके टॉप को उतार उसके चुचों के साथ खेलते हुए चूसने लगा था | मैंने उसे उसे वहीँ के एक खाली क्लासरूम में ले गया और वहाँ का दरवाज़ा बंद कर एक बेंच पर लिटाते हुए उसके साथ खड़े – खड़े चुम्मा – चाटी करने लगा |
मैंने उसके पूरे कपड़े उतारने में देर ना बरती और उसे वहीँ लिटाये हुई उसकी चुत को उप्पर से ही मसलते हुए उसकी चुत पर अपनी ऊँगली डालने जिसपर वो तडपने लगी | मैं उसकी मन मोह लेने वाली गांड को पीछे से दबाते हुए चूस रहा था जिस पर उसकी चींखें भी निकल रही थी और मैं उसकी गांड में ऊँगली किये जा रहा था | अब मैं अपने लंड को जोश में उसकी चुत में दे मारा और उसकी चुत में बड़ी तेज़ी से अंदर – बहार करने लगा | वो मुझे रोते रोकने की कोशिस कर रही थी पर मैं अपने आप को चाहकर भी रोक ना सका | मैंने वहीँ गज़ब तरीके से उसकी बेदर्द तरीके से चुत मारी और आखिर वहीँ उसके उप्पर झाकर उसे वहीँ बेंच से उतार कर उसकी गांड के छेद को चाटा हुआ उसकी चुत का पानी भी निकाल दिया |

एमबीए और कॉलेज का प्यार

एमबीए और कॉलेज का प्यार
हाई दोस्तों,
मेरा नाम शाहिद हे और मैं आगरा का रहने वाला हूँ | मैं अभी एमबीए कर रहा हू और मेरे सामने वाली लड़की अभी कॉलेज कर रही हे | हम दोनों का करीब तिन महीने से चल रहा हे | हम दोनों रात रात भर सेक्स की बातें किया करते हे और वो उधर चुत में ऊँगली करती हे और मैं यहाँ तेल लगा के हिलाता हूँ | हम दोनों जब झड जाते हे तब सो जाते थे | एक दिन पापा माँ को दिखने के लिए हॉस्पिटल लेके गए थे और शाम को ही आने वाले थे | मेरे घर वालो के जाने के बाद मेने उसे फोन करके बताया तो वो बहुत खुश हुई और अपने घर से कुछ बहाना मार्के चुपके से वो मेरे घर में आ गयी |
घर में घुसते ही मेने कुंडी लगा दी और उसे गोदी में उठा के अपने बिस्तर पे लेटा दिया | मेने जल्दी जल्दी अपने शर्ट और पेंट उतार दिए और सिर्फ चड्डी में उसके उपर लेट गया और उसे चूमना शुरू कर दिया | वो पहले साथ नही दी पर धीरे धीरे गर्म होती गयी और मेरा साथ देने लग गयी | मैं उसे चुमते चुमते उसके चुचो पे आया और उसके चुचो को मसलते हुए उसके निप्पल को काटने लगा | वो मस्त में सिसकिय भरी जा रही थी और फिर मेने उसे कपड़े उतारने को कहा तो वो एक दम से पूरी नंगी होके मेरे सामने लेट गयी | मैं उसके गोरे और चिकने जिस्म को देख के पागल सा हो गया | खास कर उसके एक दम साफ़ चिकनी चुत को देख के जो गीली थी | मेने उसके दोनों चुचो को हाथ में दबाया और एक एक करके निप्पल चूसने लग गया | वो सिसकिय भरना शुरू कर दी और मेरे सर को पकड़ के अपने चुचो पे रगड रही थी |
मैं करीब दस मिनट उसके चुचो को चूसा दबाया सब कुछ किया और फिर उसके पुरे जिस्म पे हाथ फेरते हुए उसके चुत के उपर आ गया | चुत को मेने जेसे ही चाटना शुरू किया वो एक दम से मस्त हो गयी और जोर जोर से कराहने लग गयी आआआआआईईइ अह्हह्ह ह्म्म्म्म्म्म आह ओह्ह्ह्ह किये जा रही थी और फिर मेने उसके चुत के पंखडियो को खोल के उसके चुत के अंदर वाले हिस्सों को चाटने लगा तो वो एक दम से झड गयी | मेने उसके चुत का एक एक बूंद चाट चाट के साफ़ कर दिया |
चुत साफ़ करने के बाद मेने मेने उसके टांगो को उपर की तरफ उठाया और फिर अपने लंड को उसके चुत पे रगड़ने लग गया, फिर एक दम से उसके टांगो को चोद के मैं किचन से तेल लाया और अपने लंड पे अच्छे से लगा दिया और उसकी चुत पे भी | उसके बाद मेने अपने लंड को उसकी चुत पे रखा और रगड़ने लग गया और उसके निप्पल को चूसना शूर कर दिया | एक तरफ चुत पे लंड रगड रहा था और दूसरी तरफ निप्पल चूस रहा था | चूसते चूसते मेने उसके होठो को चूसना शुरू कर दिया और निचे से धक्का दे दिया | उसकी चीख मेरे मुह में दब गयी और लंड उसके चुत को चीरता हुआ अंदर चला गया | वो रोने लग गयी पमें रुका नही और लंड को अंदर बहार करने लग गया, करीब पाँच मिनट बाद उसका दर्द उसे मजा देने लग गया |
और वो एक दम से कराहने लग गयी और बिस्तर को नोचते हुए अह्ह्ह्ह्ह्ह ह्म्म्म उ ऊ उ उ उ और करो बहुत अच्चा लग रहा हे और और करो अह्हह्ह ह्म्म्म ईई ओह्ह्ह जोरसे और जोरसे आज इसे फाड़ ही डालो हम्मम्मम एस्स्स्स्स्स फक में हार्ड यह्ह्ह्ह फक में फक में एस्स किये जा रही थी | मैं उसे कस कस के पेलने में लगा हुआ था और वो अब तक एक और बार झड चुकी थी | अब मेरे झड़ने का समय आ गया था और मेने उससे पुचा तो वो बोली अंदर ही डाल दो बाद में देख लेंगे इसको | मैं कस कस के शोट देते हुए उसके चुत में ही टपका दिया सारा माल |
हम दोनों काफी थक चुके थे और फिर हम दोनों ने एक घंटा आराम किया और उसके बाद एक और गेम खेला | सब कुछ होने के बाद मेने उसे अपने घर के पीछे से भेज दिया और फिर दो हफ्ते बाद हमे फिर मोका मिला तो हमे फिरसे मस्त मजे किये |

रात चुत गांड लंड सब बाकी हैं |

रात चुत गांड लंड सब बाकी हैं |
दोस्तो,आज मैं जो आपके सामने कहानी बताने जा रही हू वो मेरे जिंदगी की सबसे मीठी याद हैं | जब मैं अपने कॉलेज मैं थी तबसे मैं बहुत ही खुले किस्म की लड़की थी | कॉलेज में रहते रहते मेरा ३ लडको के साथ चक्कर चलने लगा था | लडको लडकियो की चुदाई की कहानिया, ब्लू फिल्म ये सब मेरे लिए एक मामूली सी बात हो चुकी थी | मैं एक अच्छे घर से थी और मुझे एक चुदक्कड लड़की बन्ने में जादा समाये भी ना लगा | अब यही मेरी दिल बहलाने का सामान हो चूका था |यह बात कुछ एक साल पहले की हैं, मेरे घर में मेरे भाई का एक दोस्त आया था और उसका नाम विजय था, उसे में बचपन से जानती थी | मेरे भैया भाभी किसी काम से बहार गए हुए थे | विजय मेरे भैया भाभी और मेरे साथ घुल मिल गया हुआ था और हम सबके साथ मजाक भी किया करता था | पर एक बात थी, वो सबके साथ जेसे रहता था वेसे मेरे साथ भी रहता था मगर वो सबसे नज़र चुरा के जब मुझे देखता था तो उसकी नज़र में कमीना पन जरुर दीखता था | में उसकी नज़र को समझ गयी थी |
एक दिन की बात हैं, वो टीवी देख रहा था, में भी उसी कमरे में पहुच गयी और उसी के सामने उसके तरफ पीठ कर के खड़ी हो गयी, फिर मेने जानबुज के अपने हाथ से रुमाल गिरा दिया, और फिर उसे उठाने लगी | उठाते समाये मेने झटके से उसकी तरफ देखा तो मेरी शक सही निकली | वो तब टीवी देखने के बजाये मेरी चुतड को निहार रहा था, और उसी समाये मेने उसके खड़े लंड को भी देख लिया जो उसके कच्छे से बहार आने को बेताब था | मुझे इस बात का बिलकुल भही बुरा नहीं लगा, क्युकी वो एक मर्द हैं इसीलिए |मेरी गांड कोई भी देखे तो उसका लंड खड़ा ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता | उसी तरह मेरी गांड को देख के विजय का भी लंड खड़ा हुआ था | उस वक्त विजय भी समज गया था की वो पकड़ा गया हैं, और उस वक्त जब मेने उसे पकड़ लिया था तब मेने उसे देख मुस्कुरा दिया, जिसके कारण उसकी हिम्मत और बड गयी थी मेरे तरफ आने को | जब तक ये सब चल रहा था तब तक भाभी आ चुकी थी तो विजय ने पास ही पड़े तकिये से अपने लंड को ढक लिया था |आप सब तो जानते ही हैं की जब हम दोनों एक घर में हे तो एक दूसरे को बड़ी हसरत से देखते थे | और हम दोनों के मन में क्या था उसे अब तक तो कोई भी पकड़ नहीं पाया |
जब भी में उसके सामने से निकलती मेरी चलने की चल बदल जाती, जिसे विजय बड़ी प्यार से देखता रहता  और मेरी चुतड के तब पंख लग जाते थे |एक हफ्ता ऐसा आया की मोम को ऑफिस के किसी काम से गुजरात जाना पड़ा और भैया भाभी अपने घर वापस जाने लगे | उनके साथ विजय को भी जाना था उसी दिन भैया भाभी को छोड के उसके उसदिन वही से अपने लिए दूसरी ट्रेन पकडनी थी | वो भी चला गया, सब चले गए | मैं घर पे अकेली रह गयी, और मैं तो ये सोच सोच के पागल हो गयी की विजय इतनी मेहनत कर के मुझे गरम किया और मुझे बिना चोदे केसे वापस चला गया, और यहाँ एक से एक लकड़े मुझे पेलने के लिए अपना लंड लिए घूमते रहते हैं | और ये विजय की मुझे इतने दिनों तक गरम किया और बिना लंड दिए चला गया |उसके बारे में सोचते सोचते शाम हो आई, भैया मुझे ट्रेन से बार बार फोन क्र क बता रहे थे की अब यहाँ पहुचे है अब यहाँ यही बता रहे थे मुझे | फिर एक बार क्या हुआ की में भैया से बात क्र रही थी की दरवाजे की घंटी बजी, मेने जाके दरवाजा खोला तो मेरी आँखे फटी की फटी रह गयी, सामने विजय खड़ा था | उसने मुझे अपना बैग दिया और अंदर घुस आया |
मैं – तुमको तो इस वक्त ट्रेन में होना था, यहाँ क्या कर रहे हो ?वो – मुस्कुराते हुए, मेरी ट्रेन छुट गयी |मेने फिर दरवाजा बंद किया और उसे पूछा ” ट्रेन छुट गयी या फिर जन बुज के छोड दिए ?वो – जब पता हे तो फिर क्यों पुच रहे हो मुझसेफिर मेने उसकी तरफ़ा उसके आँखों में आंहे डालते हुए मुस्कुरा दिया | मेरे दोनों पेरो के बिच की नागिन को एक नाग की जरुरत थी | मेने फिर उसके पेंट की तरफ देखा तो उसमे मुझे नाग दिख गया और वो कितना बड़ा था वो भी पता चल गया | अब बस मेरी नागिन उस नाग के किसी हरकत के इंतज़ार में थी | मोसम इतना सुहाना था की आप लोगो को क्या बताऊँ | एक तो घर में एक नाग और एक नागिन, उपर से रात का समय और उसपे बारिश का मोसम | बस किस पाल के इंतज़ार में थे, वो बस मेरी नागिन ही जानती थी | कुछ देर के बाड विजय मेरे सामने ही अपने गीले कपडे उतारने लगा | उसने सारे कपडे उतार दिए थे सिर्फ अपनी गीली चड्डी नहीं उतारी | उसकी इस हिम्मत को देख के मेरी नागिन अंदर ही अंदर गीली होने लग गयी थी | वो फिर अपने बैग से अपना टावल निकलने लगा और मेरी तरफ देख रहा था |मेने फिर उसे बड़े ही प्यार भरे अंदाज़ से कहा ” तुम तो बड़े बेशर्म हो, जवान लड़की के सामने ही कपडे उतारने लग गए, ये कहते हुए में उसके उभरे हुए लंड को ताक रही थी |वो – ( मुस्कुराते हुए ) क्यों जी आपको मेरी चड्डी नहीं दिख रही हे क्या, या ये काफी नहीं हैं |
मैं – अगर चड्डी काफी हे तो फिर कपडे क्यों निकल रहे हो ?वो – ठीक हैं तुम कहती हो तो नहीं पहनुगा |मैं – क्यों हर कम मेरे कहने से ही करोगे क्या ? कुछ काम होते हे जो खुद से करने पड़ते हैं | इतना कहने के बाद में उसके तरफ बड़ी और उसकी आँखों में मेने अपनी आँखे अटका दी | और फिर में जेसे ही [इचे को मुडी उसने अपनी टावल मेरे सर पे रख दी, मेने टावल हटाया तो देखा की विजय मेरे सामने खड़ा हैं और एस बार उसका लंड पहले से काफी जादा फूला हुआ था | मैं कभी उसकी आँखों में देखती तो फिर कभी उसके उभरे हुए लंड को, चड्डी फाड के बहार आने को बेताब था | वो मेरी तरफ बड़ा और मेरे हाथ को अपने लंड पे रख दिया | उसके लंड पे हाथ क्या रखना था की मेरी नागिन एक दम से मचल उठी | मेरा मन तो नहीं था पर मेरी नागिन के कारन में उसके लंड को दबाने से रोक नहीं पी और मेने उसके लंड को अपने हाथो से दबा दिया | मेने उसके लंड को दबा क्या दिया उसके नागराज ने भी अंदर से हरकट क्र दी जिसके कारन वो मेरी तरफ और चिपक गया और अपने हाथो को मेरे प्यासी चुचियो पे रख दिया | उसका हाथ क्या रखना था मेरे चुचियो पे की मेरी सांसे एक पल के लिए रुक सी गयी और फिर जब उसने दबाया तो मेरी मुह से एक मीठी सी अह्ह्ह निकल गयी | मेने भी फिर अपनी नागिन की बात सुनी और उसके चड्डी में हाथ डाल दिया और उसके नागराज को अपने मुठी में भर लिया और अंदर ही मसलने लगी |
फिर उसने मुझे आँखों से कुछ इशारा किया और में उसे समझ गयी और फिर उसके लंड को बहार से ही चूम के उसके चड्डी को उतर दिया और उसे नंगा कर दिया |कसम से क्या लंड था उसका…….एक दम मेरे मुह के सामने लटक रहा था, गोरा सा एक दम तना हुआ, उसके लंड का सुपर एक दम लाल हो चूका था | मैं तो यही सोचती रह गयी बनाने वाले ने क्या चीज बने हैं | और यही सोचते सोचते कुछ ही देर में उसका नागराज मेरे नाजुक होते के बिच में आ गया था |अह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह चूस चूस मेरे लंड को चुस्स्स्स वह क्या चुस्ती हे रे तू अह्ह्ह्ह्ह्हवो मुझसे अपने लंड को चुसवा रहा था और उसे मज़ा भी काफी आ रहा थ | कुछ देर के बाद उसने मुझे खड़ा किया और मुझे एक ही पल में पूरा नंगा कर दिया और फिर मुझे अपनी गोदी में उठा कर बिस्तर पे लेटा दिया | उसके बाद उसने मेरी टांगो को खोल दिया और उसमे अपने मुह को रख दिया और मेरी चुत चाटने लगा | इसके बाद में भी कुछ भी बकने लगी ओह्ह डिअर फक में लुट लो मुझे फाड़ दो मेरी चुत को |अब वो मेरे उपर धीरे धीरे मदहोश होने सा लगा | वो खड़ा हुआ और अपने मोटे नाग को मेरी नागिन के उपर रख दिया | उसने मेरी चुत को चाट चाट के पूरी तरह से गीली क्र दी थी और अब उसपे उसने अपने नाग को रख दिया | फिर उसने अपना नाग को थोडा सा मेरे नागिन पे रगडा और उसके एस रगड़ने के कारन मैं बुरी तरह सनसना उठी, और फिर एक ही बार में फच क्र के उसने अपने नाग को मेरी चुत में उतार दिया |
अह्ह्ह्ह्ह ऐईईईइ क्या लंड हे तेरा एक ही बार में मज़ा आ गया………….. ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म अह्ह्ह्ह्हवो – ले खा मेरा लंड, अपनी चुत की भूक प्यास बुझा ले, ले ले और खा मेरा लंड |उसकी एन सब बातो से मुझे शर्म तो आ रही थी मगर में शर्मा ही नहीं प् रही थी, क्यों की मज़ा भी तो मुझे गजब की आ रही थी | क्या लंड था उसका, चुत में घुसते ही मुझे एक लड़की होने का एहसास दिला दिया | उसने फिर मेरी चुचियो को अपने दोनों हाथो में पकड के मसलना शुरू कर दिया और निचे से अपने लंड से मुझे हर ढके पे मज़ा दिए जा रहा था |  उसका लंड मेरी चुत की गहराई को अच्छे से नाप रहा था और मेरी नागिन को अपने नाग की तरफ आकर्षित क्र रहा था | उसके सामने में धीरे धीरे रंडी बनती जा रही थी और उसको में अपनी गांड उछाल उछाल के देने लगी थी मैं |वह मेरी जान, क्या मस्त चुदवाती हो तुम………. तुम एसी तरह मेरी साथ दो तो में तुम्हे सारी रात चोदता रहूँगा, उसने कहा |फिर कुछ देर के धक्को के बाद उसने अपने होठ मेरे होठो पे रख दिया और मेरे होठो को चूसने लगा, मैं भी पीछे नहीं रही और कच कच चूसने के बाद मेने उसके होठो को काट लिया और वो अआआया क्र के चिल्ला उठा |होठ पे होठो हो और चुत में मोटा लंड हो तो चुदाई का मज़ा ही कुछ और आता हैं | और यह बात वोही लड़की जानती होगी जो एस तरह कभी चुदी होगी | अह्हह्ह क्या मज़ा आया और मैं झड गयी |
झाड़ते वक्त भी क्या मज़ा आता हैं, एसी लिए आमिर बाप की बेटी भी एसी मज़े के लिए रंडी बन जाती हैं | कुछ देर उसने और धक्के लगाये मेरी चुत में और फिर अपना लोडा निकल के मेरे चुचो के बिच में रख दिया और मुझे कहा की अपने चुचो को अपने हाथ से बाजु से दबा | मेने वेसा ही किया और फिर वो मेरे चुचो को पेलने लगा | कुछ १० – १५ झटको के बाद उसके लंड ने पच कर के मेरे मुह गीला कर दिया | फिर उसने अपने लंड को पकड़ क्र मेरे होठो पे रखा और आँख मरी मुझे | मैं खूब समझती थी उसके इशारे और फिर मेने अपनी जीभ निकल के उसके लोड पे लगी मुठ को साफ़ किया और फिर उसके लोड को चूसने लगी | उसने अपने लोड को पकड़ के निचोड़ दिया और उसके लंड के नली में जो बचा कुचा माल था वो मेरे मुह में डाल दियाक्या बात क्या बात मेरी जान, मैं तेरे बारे मई सही सोचता था |क्या सोचते थे मेरे बारे मैं ?यही की तुझमे एक हाई प्रोफाइल रांड छुपी हैं | उसने इतना बोला ही था की मेने उसे पकड़ के अपनी तरफ खीचा और उसे चूम लिया |वो – मुह क्या चूमती हैं जाने मन चूमना हैं तो लंड चूम | इतना बोलते ही वो अपने लंड को पकड़ कर मेरे मुह में दे दिया और मैं उसे चूसने लगी | उसका लंड मेने इतनी कास कास के चूसा की उसका लंड मेरे मुह में ही फूलने लगा | उसने फिर अपने लंड को मेरे मुह से निकला और कहा की चल बाथरूम | मेने पुचा की क्यों ? उसने कहा मुझे पिसब लगी हाई, तू भी चल मिल के करेंगे |
फिर हम दोनों उठ क्र बाथरूम गए और पिसब क्र के आये और फिर अगले गेम के लिए तैयार हो गए |फिर हम जब फिरसे बिस्तर में आया और मैं सीधा आके बिस्तर पे लेट गयी, वो आया और मेरे बाजु में बेथ गया और मेरे कमर पे मार्के मुझे पलटने का इशारा किया | मैं फिर पेट के बल लेट गयी और फिर वो मेरे पेरो पे बैठ गया और फिर मेरे चूतडो को मसलने लगा और कुछ देर मसलने के बाद उसने मेरी गांड को चोदी करदी और फिर उसमे अपनी ऊँगली फेरने लगा |मैं – जानू सही क्र रहे हो और करो…… तुम गांड में ऊँगली बहुत अच्छे से करते हो अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ह्म्म्म्म्म्म्म |वो – मुझे गांड दिखा के मजे ले रही हैं ? इतना कह के उसने मेरी गांड पे एक थप्पड़ मारा |मैं – बड़े जालिम हो तुम | कोई ऐसे मरता हैं क्या ?वो – अभी तो बस थप्पड़ मारा हैं, थोड़े देर और रुको और क्या क्या मारूंगा वो भ देख लेना |इतना कह क्र उसने मुझे कमर उठाने को कहा | मेने भी अपनी कमरा उठा ली और पेरो को दोनों तरफ फेला दिया और उसके मुह की तरफ अपनी गंद्को खोल दी मेने |वो – हाई रे मेरी रांड, क्या हे तेरी गांड | आज तो एस गांड की गांड मारनी हे मुझे |उसने फिर पास ही राखी तेल की बोटल उठाई और उसमे से तेल ले के मेरी गांड के छेद पे लगा दिया और अपने लंड और ऊँगली पे भी लगा लिया | उसने फिर अपनी एक ऊँगली मेरे गांड में डाली वो चली गयी, फिर उसने मेरे गांड के छेद पे अपने लंड को रखा और धीरे धीरे सरकाने लगा |
मैं – उईईईईइ ईईईईईईईईईईईईइ धिरीईईईए अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मार दिया अ अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह धीरे अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह |उसने मेरी परवाह किये बिना मेरे कमर को पकड़ा और कास के अंदर अपना नाग को मेरी गांड में डाल दिया और उसका लंड अब मेरी गांड में फस गया | मेने अपनी गांड को झट पटाया मगर मेरी गांड में वो दम कहा की उस मोटे लोड को निकल देता |  साले ने गजब की सेटिंग की हुई थी मेरी गांड मरने के लिए | उसने फिर अपना लंड हलके से निकाल के फिरसे अंदर दे मारा | काफी देर ढके के बाद उसने अपनी लंड की गति बड़ा दी और मेरी गांड की गांड मार दी |मैं कब से चिल्ला रही थी की अह्ह्ह्ह्ह साले ने गांड फाड़ दी हाई राम कोई मुझे बचाओ | मगर साले के कान में कुछ घुस ही नहीं रहा था, और लगा हुआ था मेरी गांड मारने मैं | फिर काफी देर के बाद जब मेरी गांड का दर्द कम हुआ तो मी अपनी गांड ढीली कर दी और फिर उसके लंड के साथ मज़े लेने लगी |वो – अब केसा लग रहा हाई मेरी रांड ? और खा मेरे लंड को ले ले और ले |मैं -  साले रांड तो ऐसे बोल रहा हे जेसे की मई सच में रांड हू और तुने मुझे पेलने के पैसे दिए हैं | कुछ ही देर में उसने अपनी लंड की गति बड़ा दी और मुझे कास कास के पेलने लगा, मैं समझ चुकी थी की अब वो झड जायेगा | और फिर अचानक उसने अपने लंड को बहार निकल लिया और मैंने भी झट से रंडी पांति दिखा के उसके लंड के पास मुह ले आई |
विजय ने कास के सांस ली और मेरे मुह अह्ह्ह्ह्ह्ह चिल्ला के मेरे मुह मैं मूठो की बरसात करदी | मैं भी उसके दिए हुए मुठ को पी गयी और फिर उसके लंड को चूस चूस के एक दम साफ़ कर दी |वो – और मेरी छिनाल, और क्या क्या सोचा रखा हैं आगे का ?मैं – तुम मेरे मेहमान हो आज की रात | और सोचना क्या हे रात बाकी हैं, चुत और गांड यही हाई, चाहो तो फाड़ दो इसे आज की रात | जो भी करोगे आज ही करोगे, कल न मिलेगा फिर ये मोका |विजय फिर से एक और बार मुझपे टूट पद, और मैं भी पैर खोल के लेट गयी और उसके बेदर्द लंड ने फिरसे मेरी चुत के दीवारों को फाड दिया और फच फच करने लगा | और एस बार मेने भी अपनी शर्म छोड दी, और चिल्ला चिल्ला के चुदवाने लगी |

मेरी क्लास मेट ने मुझे चोदा

मेरी क्लास मेट ने मुझे चोदा
मेरा नाम श्याम है और मै एक प्रोफेशनल कॉलेज मे पढता हु | इन कॉलेज मे क्लास का समय बड़ा ही अजीब होता है, तो मै होस्टल मे रहता हु | मेरी किस्मत अच्छी है, कि पढाई मे काफी अच्छा हु और मेरे क्लास के सारे बच्चे और मेरे प्रोफ़ेसर जानते है, कि मै काफी अच्छा करता हु और सब मुझे काफी मानते भी है | मै एक पढ़ाकू किस्म का इंसान हु और सब लोग पढाई मे, मेरी मदत भी लेते है | मै थोडा सा शर्मीला इंसान भी हु, इसलिए मै लड़कियों से बात-वात नहीं करता और उनसे दूर ही रहना पसंद करता हु | मेरी क्लास मे, एक लड़की है नीलिमा | उसने भी कई बार मेरी मद्दत लेने की कोशिश की; लेकिन मैने उसको कोई खास भाव नहीं दिया | नीलिमा बड़ी ही खुबसूरत और सेक्सी लड़की थी और बहुत ही बिंदास थी | उसको कोई कुछ भी नहीं बोला सकता था, क्योकि कॉलेज का बोक्सिंग चैम्पियन, अमित उसका बॉयफ्रेंड था |अमित ने शायद एक दो बार नीलिमा को मुझे से बात करते हुए देख लिया और कुछ गलत समझ लिया था | उसने मुझे उस ने कई बार हडकाया था और सख्त हिदायत दी थी, कि मै नीलिमा के आसपास भी ना फटकू |
मै नीलिमा से जितना दूर हो सकता था, उतना दूर रहता था और उसके विपरीत नीलिमा मेरे पास आनेकी कोशिश करती थी और मेरा मजाक भी उड़ाती थी | एक बार एक प्रोजेक्ट मे, मै नीलिमा का पार्टनर बन गया; तो मैने प्रोफ़ेसर से अपना नाम वापस लेने की गुजारिश की; लेकिन नीलिमा ने मना कर दिया और मुझे मजबूरन नीलिमा के साथ काम शुरू कर पड़ा | उसने जब अमित को ये बताया, तो वो मुझे आँखे दिखाने लगा | तब नीलिमा ने उसे बोला, थोडा रहम करो; तुम्हारी ये फालतू की बेवकूफी मे, मै फेल हो जाउंगी और तुम्हारे बसकी ये प्रोजेक्ट करना नहीं है | तो मुझे श्याम के साथ ही काम करने दो | अमित पढाई मे काफी कमजोर था और खुद ही खेलकूद कोटे के वजह से पास हो जाता था, नीलिमा को क्या पास करवाता?अमित ने हथ्यार डाल दिये और मुझे बोला, ढंग से करना | नीलिमा ने मुस्कुरा कर, सबके सामने अमित को एक पप्पी दी और अपने हॉस्टल चली गयी | अमित को बाहर जाना था और वो उस रात को ४-५ दिन के लिए बाहर चला गया | कहने के लिए तो, लड़के-लड़कियों का हॉस्टल अलग था; लेकिन केवल एक ही लकड़ी की बड़ा सा दरवाजा था और उसमे भी लड़के और लड़कियों ने सुराख़ बना दिया था | रात मे लड़के और लड्किया एक दुसरे के कमरों मे होते थे और मस्त वाली कामक्रीड़ा चलती थी |
नीलिमा भी अमित के कमरे मे आती जाती रहती थी और मज़ेदार बात ये थी, कि अमित और मेरा रूम बिलकुल अगल बगल था और मुझे नीलिमा की रात को चुदने के काफी आवाज़े आती थी | तब मुझे ये नहीं मालूम था, कि एक रात को नीलिमा मेरी बाहों मे भी होगी |हम दोनों ने उसी रात को काम शुरू करने का निश्चय किया और रात को नीलिमा मेरे रूम मे आ गयी | बड़ी मस्त लग रही थी, वो | बहुत ही सेक्सी ड्रेस पहनी थी, उसने | उसकी मस्त टाँगे, उसके चूचो की लकीर मुझे साफ़-साफ़ दिखाई दे रही थी | मेरे मन कभी सेक्स के बारे या कोई कामुक विचार नहीं आया था, लेकिन नीलिमा को देखकर मेरे लंड एक-दो झटके तो मार ही दिये | नीलिमा की नज़र मेरे लंड की और ही थी और जब उसने मेरे लोवेर के अन्दर हरकत देखी तो हंस पड़ी और बोली, तू डरता है, लेकिन देख ये मुझे चाहता है | मैने अपने लंड को अपने हाथ से छुपा लिया, ताकि नीलिमा को कुछ ना दिखाई पड़े |नीलिमा ने सारे खिड़की और दरवाजे बंद कर दिये और मेरे पास आकर बैठ गयी और अपने होठ मेरे लंड के ऊपर रख दिये और कपड़ो के ऊपर से ही उसको चाटने लगी | मुझे उसकी इस हरकत मे बड़ा मज़ा आया और मेरा लंड झटके मार के एकदम खड़ा हो गया | नीलिमा ने मेरा लोवेर अपना हाथ डालकर खीच लिया |
मुझे रात मे अंडरवीयर पहने की आदत नहीं थी; तो लोवेर उतारते ही मेरा लंड फुंकार खड़ा हो गया | नीलिमा ना उस अपने हाथ मे ले लिया और अपने ड्रेस के ऊपर से अपने चुचे रगड़ने लगी | मुझे सहन नहीं हो रहा था और मेरे मुह से अपने आप कामुक आवाज़े निकल रही थी | मै चाहकर भी अपने आप को रोक नहीं पा रहा था | फिर, नीलिमा ने अपने कपडे उतार दिये और मेरे सामने नंगी हो गयी | उसका गोरा और छरहरा बदन देखकर मेरी लार टपकने लगी और मेरे लंड ने जोर मरना शुरू कर दिया |नीलिमा मेरे हाथ को पकड़ा और अपनी कमर के पीछे लेजाकर अपनी गांड पर रख दिये और मुझे अपने शरीर से चिपका लिया | मुझे करत लगा, मैने किसी भी लड़की को पहली बार छुआ था | ये पहली बार था और नीलिमा सेक्स की खिलाड़ी थी और वो मेरे साथ कोई जल्दी नहीं करना चाहती थी | उस दिन उसने मुझे सेक्स के लिए नहीं कहा और मेरे लंड को अपने अपने हाथ मे लेकर मेरा मुठ मारने लगी | मेरा शरीर गरम हो रहा और तप रहा था और नीलिमा मेरे लंड से खेल रही थी | फिर, नीलिमा ने मेरा लंड अपने शरीर से रगड़ना शुरू कर दिया और कुछ ही मिनटों मे मैने अपना पानी नीलिमा के शरीर पर छोड़ दिया | नीलिमा बाथरूम मे गयी और अपने साफ़ किया और मेरे होठो को चूसने लगी | फिर, नीलिमा ने मुझे कुछ सेक्स सीडी दी और देखने को कहा और खुद चली गयी | जब तक अमित नहीं आया, नीलिमा ने मुझे पक्का सेक्स का पुजारी बना दिया | उन दिनों हमने पूरी-पूरी रात संभोग का मज़ा लिया और मस्त की |

ये सब मुझे पसंद नही हे

ये सब मुझे पसंद नही हे
हाई दोस्तों, मेरा हर दिन एक जैसा ही होता हे, कुछ बदलता नहीं और कुछ खास होता भी नही | पर एक दिन ऐसा आया जिस दिन मेरी हालत खराब हो चुकी थी | एक दिन की बात हे में गया हुआ था स्कूल, स्कूल में मैं अपने कंप्यूटर क्लास के लिए जा रहा था | सब मुझसे पहले ही चले गए थे, हमारे स्कूल में दो कंप्यूटर लैब एक साथ हे | उस समय में कुछ सोचते सोचते जा रहा था, मुझे घुसना था दूसरे कमरे में पर में गलती से पहले वाले रूम में घुस गया | मैं जब अंदर घुसा तो मेने देखा की अपनी मैडम टेबल पे कुछ काम कर रही हे पर उनका एक हाथ उनकी चुत के उपर था और शायद वो उन्हें मसल रही थी | मेने उन्हें मसलते हुए तो देखा नही पर में समझ गया की वोही हो रहा था | मैं मैडम को सॉरी बोलके बाहर आ गया और दूसरे कमरे में घुस गया | अब पूरा दिन मेरे खोपड़ी में वही चलता रहा, की मैं जल्दी क्यों घुसा आराम से दख सकता था की साली क्या कर रही थी | मेने सोचा आज बच गयी तो क्या हुआ कल साल मेरे हाथो ही पकड़ी जायेगी | मैं फिर दूसरे दिन उन्ही के कमरे में गया और देखा की कोई नही हे तो में अंदर घुस के कंप्यूटर रूम के दरवाजे में एक काले रंग की प्लास्टिक लगी होती थी जिससे आरा पार नही दीखता था, मेने उसे हल्के से काट दिया निचे से, बहुत ही बारीक़ से काट के निकाल दिया | अब मुझे जब भी मोका मिलता में उनके कमरे के आस पास चक्कर लगाता और देखता की क्या चलता हे अंदर | मुझे एक हफ्ते तक कुछ नही मिला पर एक दिन मुझे बहुत कुछ दखने को मिल गया | उस दिन हुआ यूँ की में अपनी एक नोट्स भूल गया था स्कूल में, में बिच रस्ते से वापस गया और फिर नोट्स लेके जाने लगा तो मेरे मन में हुआ की एक उपर से चक्कर मार के आऊ |मैं जब उपर गया और फिर उस जगह से झांक के देखा तो मेरी फट गयी, अंदर देखा की मैडम कोई सेक्स साईट खोल के उसमे छोटी छोटी वीडियो क्लिप दख रही हे और अपनी चुत में पेन डाल रही थी | मेरा उसी वक्त मूड बन गया की आज में इसे चोद के ही छोडूंगा | मेने दरवाजा खटखटा दी, और मैडम झट से उठके अपने आप को ठीक की और फिर कुछ मिनटों में दरवाजा खोल दी और मुझे दख के बोली क्या हुआ बोलो ? मैं बोला की मैडम मेरी पेन यहाँ छूट गयी हे वो लेना हे, मैडम बोली दख लो कहा पे हे | मैडम जाके अपने कुर्सी पे बैठ गयी और में एक्टिंग चोदने लगा की सही में पेन गुम हुई हे | यहाँ वहा दखने के बाद मैं दरवाज़ा के पास गया और कुण्डी लगा दी, मैडम मेरी तरफ देखी और बोली ये क्या किया तुमने, मेने कहा की जादा मत बोलो मेने आपको दख लिया की आप क्या कर रही थी | मैडम के तब हल्के हल्के पसीने आने लग गयी, में बोला डरो मत में किसी को कुछ नही बताऊंगा पर एक शर्त हे मेरी | मैडम बोली की क्या देखा तुमने ये बोलो पहले, मेने बोला अच्छा आब नाटक कर रही हो, जरा अपना पेन देना में जरा सूंघ के देखूं उसे, तब मैडम की गांड फट गयी और मुझे बोलने लगी की प्लिज्ज़ प्लिज्ज़ किसी को मत बोलना कुछ में हाथ जोड़ती हू | मेने कहा मैं नही बोलूँगा पर एक शर्त हे मेरी | वो बोली की बोलो बोलो में हर शर्त मानूंगी, मेने बोला की इस पेन के जगह अब से मेरा मोटा पेन होगा | वो बोली में कुछ समझी नही, मैं बोला हर बात पे एक्टिंग मत पेला करो और फिर में खड़ा हो गया और उनके सामने अपना लंड निकाल दिया और बोला की मुझे ये वहा डालना हे |वो मेरा लंड दख के बोली की ये क्या हे सब, मुझे ये सब पसंद नही हें | मेने बोला उन्हें ” ओये जादा दिमाग मत चाटो मेने देखा तुम्हे चुत मै पेन करते हुए, और जब असली चीज़ निकला तो नाटक चोद रही हो | आप चुप चाप मेरे साथ करो मै किसी को कुछ नही बोलूँगा वेसे भी आप भी प्यासी हो और मै भी प्यासा हूँ ” | वो कुछ सोची और फिर आँखे निचे कर ली, मेने पास ही रखे एक कंप्यूटर मै नेट खोल के ब्लू फिल्म लगा दी और मैडम के बाजू मै बैठ गया और उनके जिस्म को सहलाने लग गया, और मैडम धीरे धीरे मुझमे सिमट जाने लग गयी | मेने उनका मुह फिल्म की तरफ कर दिया और खुद उल्टा एट गया, अब मै उनके पुरे जिस्म पे हाथ फेरने लग गया, और वो मुझसे धीरे धीरे कर के पूरा ही चिपक गयी और अब वो मुझे चूमने लग गयी | मैं अपने दोनों हाथो को उनके छाती से चिपका दिया और उनके चूचो को मसलने लग गया, वो अब अपने सर को यहाँ वह हिलाने लग गयी और मेरे शारीर पे हाथ फेरने लग गयी | मै उनके चूचो पे अब अपने मुह को रख दिया और उनके चूचो को काटने लग गया | वो अब हल्की हल्की सिसकिय भरने लग गयी और मेरे सर को पकड़ के अपने चाहती से कस के लगाने लग गयी | मेने उन्हें टेबल पे लेटने को कहा और वो लेट गयी और फिर अब मै बाजू मै खड़े होके उनके चूचो को मसलने लग गया |मेने उनकी सलवार उपर उठा दी और उनके पेट को चूमने लगा, कुछ देर चूमने के बड मेने अपना हाथ उनके सलवार के अंदर डाल दिया और उनके चूचो को ब्रा के उपर से ही मसलने लग गया | मेने उसे सलवार उतारने को कहा और फिर उसने उतार दिया और सिर्फ ब्रा मै लेट गयी फिरसे, मैं अब उसके चूचो को ब्रा के उपर से ही काटने लग गया, मेने फिर उसके निप्पल को ब्रा के उपर से निकला और उन्हें चूसने लग गया, एक को चुस्त तो दुसरे को उंगलियो से मसलता रहता | थोड़े देर के बाद उसने खुद अपनी ब्रा खोल दी और मुझे फिरसे चूसने को कहा, मैं अब बहुत जोर सोर से उसके चूचो को चूसने लगा | वो ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म उफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह्ह्ह किये जा रही थी, उसकी जिस्म की गर्माहट मुझे साफ़ महसूस हो रही थी | वो आराम से टेबल पे लेती हुई थी और में बाजु में खड़े होके कांड कर रहा हा | मैं अब उसके चुचो को चूसते चूसते एक हाथ उसकी चुत के उपर ले गया और सहलाने लग गया | उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरे हाथ को पकड़ के अपनी चुत में रगड़ने लग गयी, और मेने भी उसका साथ देते हुए, उसके पजामे के अंदर हाथ डाल दिया और पेंटी के उपर से चुत को रगड़ने लग गया | वो अपने पजामे को ढीला करने लगी तो मेने उसे पूरा ही उतार दिया और अब वो पनटी में ही लेती हुई थी टेबल पे | उसकी सफ़ेद रंग की पेंटी एक दम गीली हो चुकी थी सो मेने उसे भी उतार दिया | उसकी चुत पे में एक ऊँगली करने लग गया और दूसरी तरफ उकसे चुचो को चूसता रहा, काफी देर तक यही चला और इसी बिच वो एक बार झड चुकी थी |कुछ देर के बाद मेने उसकी चुत पे मुह रखा और उसकी चुत पे जीभ रगड़ने लग गया | मेने अपनी उंगलियो से उसकी चुत की पंखडियो को अलग किया और अब मुझे उसकी चुत की छेद साफ़ नजर आ रही थी, मेने उसकी छेद पे जीभ घुमाने लग गया तो वो एक दम से कराहने लग गयी उम्म्म्म्म्म्म ई उफ्फ्फ्फ्फ़ उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ और करो ऐसे ही करो बहुत मज़ा आ रहा हे, और करो करते रहो पुरे दिन ऐसे ही करो……. ऐसे बड बड़ा रही थी वो | उसकी चुत से लगातर पानी निकल रहा था और में अपने जीभ से उसकी चुत रस कू पिता जा रहा था | मैं उसकी जीभ को ऐसे चाट रहा था जेसे कोई हलवा रखा हे उसमे | आब वो बोल उठी की अपनी पेचील डाल दो, मुझसे और रुका नही जा रहा | मेने बोला कंडोम नही हे, वो बोली कोई बात नही तुम बस लड़ आलो बाकी का में देख लुंगी | उसकी चुत का छेद दख के लगा की इस चुत में अब तक लंड नही गया पर पेंसिल ऊँगली ये सब जा चूका हे | मेने फिर उसके चुत पे थूका और आने लंड पे भी और सटा दिया लंड और फिर एक कस के शोट दिया और मेरा लंड उसकी चुत को चीरता हुआ अंदर घुस गया | मेडम तो एक दम से चीख उठी पर मेने उनके मुह पे तभी हाथ रख दिया और उनकी आवाज़ तब गयी | मेने लंड धीरे से निकला तो देखा की उसमे खून लगे हे, जादा नही पर हलके फुल्के खून लग गए | मैं लंड धीरे से निकाल के उसकी चुत में फिर से दे दिया और धीरे धीरे आगे पीछे करता रहा में, अब उसे मेरे लंड का स्वाद मिलने लग गया, और अब वो धीरे धीरे कमर भी हिलाने लग गयी और मेरे लंड को अपनी चुत से और कस कस के घिसने लग गयी |काफी देर उन्हें उसी हाल में पेलने के बाद जब उनकी मुह से कराहने की आवाज़ कम हो गयी तो मेने उन्हें टेबल पर बिठा दिया और फिर उनकी चुत में लंड देने लग गया अब मेने उन्हें अपने सिने से लगाये रखा था और उन्हें फोल्ड कर लिए था अपने से और निचे से शोट दिए जा रहा था | वो कभी मेरे कान को कटती तो कभी मेरे जिस्म पे हाथ फेरती और नाख़ून भी गाड देती | मेने फिर उनकी टांगो को कंधो पे ले लिए अब गजब का शोट देने लग गया, वो अब कस कस के उ उ उ उ उ हम्म्म्म उईई अह्ह्ह ओह्ह करने लग गयी थी | वो अब तक दो बार झड चुकी थी और मेरा भी समय आ गया था निकलें का, सो दो मिनट की और चुदाई के बाद मैं भी उन्ही की चुत में झड गया और उन्हें टेबल पे लेटा के उनके उपर चड के सो गया | उनको फिर मेने घोड़ी बना के भी पेला और उसदिन और तो नही पेला पर उसके बाद जब भी मोका मिला उनके घर पे सुहागरात मनाते और उनके पती को काम पे भेजता रहा |

मेरी क्लासमेट, मेरी जोड़ीदार, और हमबिस्तर

मेरी क्लासमेट, मेरी जोड़ीदार, और हमबिस्तर
हेलो दोस्तों, मेरा नाम नील है और मै एक कॉलेज मे पढता हु और मै बायोलोजी का छात्र हु | सब लोग जानते है, कि बायोलोजी क्लास मे नहीं पढी जाती है, वो हमेशा ही लैब मे और क्लास के बाहर ही पढी जाती है | मै अपनी क्लास का सबसे मेधावी छात्र था और सब लोग मुझ से काफी खुश रहते थे | मेरी क्लास मे, एक बड़ी खुबसूरत लड़की थी सीमा; सब लोग उसपर जान देते थे और उसको अपनी गर्लफ्रेंड बनाने के लिए तड़पते थे, लेकिन वो किसी को घास नहीं डालती थी | लेकिन, सीमा ने मेरी किस्मत का दरवाजा खटखटाया और मुझे उसे चोदने का मौका मिला और मैने भी उस मौके के मस्त तरीके से भुनाया |हुआ यू था, कि क्लास के फाईनल पेपर थे और हम सब को एक प्रोजेक्ट पर काम करना था और उस प्रोजेक्ट पर किसी को अकेले काम नहीं करना था, बल्कि दो लोगो को एक साथ काम करना था | सीमा जितनी खुबसूरत थी, उतनी ही चालू भी थी और उसने बायोलोजी के टीचर से बात करके मुझे अपनी टीम मे रख लिया, ताकि उसका प्रोजेक्ट आसानी से हो जाए और उसको पुरे नंबर मिल जाये |
मुझे लड़कियों से बात करने मे थोड़ी शर्म आती थी, तो मुझे जब पता चला कि सीमा मेरे साथ, मेरी टीम मे है, तो मुझे बड़ा अजीब सा लगा | लेकिन सीमा खुश थी | हम सब लैब मे चले गये और अपना-अपना काम करने लगे | मैने सीमा को कुछ समझाया, और खुद दूसरा काम करने लगा | मेरा लगभग सारा काम पूरा हो चुका था, बस सीमा का काम ख़त्म होते ही, हमारा उस दिन का काम खत्म होने वाला था, जब मैने सीमा की तरफ देखा तो उसने मुझे मद्दत के लिए बोला | मुझे सीमा और अपने टीचर पर बहुत गुस्सा आया, कि दोनों ने मुझे कहाँ फसा दिया; लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता था और मै सीमा के पीछे गया और उसका हाथ पकड़कर प्रयोग करने लगा | उस समय मेरे मन कोई गलत ख्याल नहीं था, लेकिन प्रयोग के समय, मै सीमा की शरीर से चिपक गया था और मेरा आगे शरीर का हिस्सा उसके शरीर के पीछे के हिस्से से चिपक गया था, उस वजह से मेरा लंड उसकी गांड से चिपक चुका था और उसको भी अपनी गांड की लकीर पर मेरे लंड का अहसास हो रहा था |मेरा लंड बार-बार खड़ा हो रहा था और सीमा की गांड पर अपनी दस्तक दे रहा था | सीमा ने कुछ नहीं बोला और हमने प्रयोग पूरा कर लिया और हम दोनों बिना कुछ बोले और सुने अपने-अपने घर चले गये |
अगले दिन, फिर से वही बात हुआ, उस बार सीमा ने जानबूझ कर ऐसा किया | उसने प्रयोग ना होने का नाटक किया और मैने फिर से उसका हाथ पकड़कर प्रयोग करवाना शुरू कर दिया | आज वो जान-बुझकर हिल रही थी और उसकी गांड मेरे लंड को रगड़ रही थी | उस दिन तो मेरा लंड पहले दिन की अपेक्षा ज्यादा खड़ा हो गया और सीमा की चूत पर जोर-जोर से टक्कर मारने लगा | सीमा ने अपनी आँखे बंदकर ली और उस पल का मजा उठाने लगी | मेरी सीट सबसे कोने मे होती थी, वहा पर मुझे कोई नहीं देख सकता था | मैने ये टेबल जानबूझकर, अपने लिए ली थी, ताकि मै अपने पढाई के अलावा भी प्रयोग कर सकू | मेरी टेबल के पास ही, मेरी टीचर के बाथरूम का दरवाजा था | जब मुझसे रहा नहीं गया, तो मै बाथरूम मै गुस गया और मैने वहा पर बड़ा ही कामुक हस्त्मथुन किया | जब मै बाहर आया, तो मेरे चेहरे पर ख़ुशी और संतोष के भाव थे, लेकिन मेरी गलती से मेरी पेंट पर एक दाग आ गया | जब, सीमा ने वो दाग देखकर तो बोली; सब अकेले-अकेले, पप्पू को क्यों कस्ट दिया, मुझे बोल देते; मै तुम्हारी मद्दत कर देती और खिलखिलाकर हसने लगी और आँख मार ली |मुझे बड़ा अजीब सा लगा और मैने दूसरी तरफ मुह फेर लिया | मै सीमा से नज़रे नहीं मिला पा रहा था और मुझे एक गलती का अहसास हो रहा था, लेकिन सीमा को तो जैसे कोई फर्क नहीं पड़ा, वो तो बस मज़े ले रही थी |
जाते हुए, सीमा ने मुझे अपने घर आने के लिए बोला और मुझे पढाई मे उसकी मद्दत करने को कहा | मै शाम का इंतज़ार करने लगा, दो बार लंड रगड़ने के बाद मेरे मन मे गुदगुद्दी होने लगी थी और हस्त्मथुन करते हुए, मुझे बार-बार सीमा की याद आ रही थी और मेरे मन मे, उसको असकी मे चोदने का ख्याल आने लगे थे | शाम, मै बड़ा तैयार होकर सीमा के यहाँ पंहुचा, सीमा ने दरवाजा खोला, उसको देखकर मेरा मुह खुला रह गया | सीमा ने बड़ी ही मस्त और कामुक नाईटी पहनी हुई थी और वो पारदर्शी थी और उसमे से उसका एक-एक अंग नज़र आ रहा था और उसके कामुक अंगो को देखकर मेरे मेरे लंड मे कसाव शुरू हो गया | सीमा ने एक प्यारी सी मुस्कान दी और मुझे अंदर बुला लिया | सीमा ने अंदर सिर्फ ब्रा-पेंटी ही पहनी हुई थी और मुझे उसके बावजूद उसका एक-एक अंग का कटाव नज़र आ रहा था |मेरा लंड बार-बार खड़ा हो रहा था और सीमा मुस्कुरा रही थी | हम दोनों ने पढना शुरू किया | पढाई शरीर मे बदलाव के बारे मे था और सीमा मुझे बड़े ही मादक नजरो से देखने लगी | जब औरत के शरीर के बदलाव के बारे बात हुई, तो उसने एक ही झटके मे अपने सारे कपडे उतार दिये और अपने एक-एक अंग को छुने लगी और मुझे दिखाने लगी | और फिर वो मेरे पास आयी और बोली तुम भी एकदम गधे हो, साले लंड को इतना कस्ट दे रहे हो और उसने मेरा लंड पेंट के ऊपर से ही पकड़ लिया और उसको खीचना शुरू कर दिया |
मेरा लंड, अब सीमा के हाथ मे झटके मार रहा था | पता नहीं क्यों, सीमा के सामने मै कुछ कर नहीं पा रहा था और उसको रोकने की हिम्मत नहीं हो रही थी | सीमा ने एक ही झटके मे अपनी ब्रा और पेंटी उतार दी और पूरी नंगी हो गयी | उसके मोटे और गोरे चुचे देखकर और उनपर गुलाबी निप्पल देखकर मेरे मुह से लार टपकने लगी | उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था और उसकी गोरी चूत पर गुलाबी से लकीर देखकर, मेरा लंड मेरी पेंट फाड़ने को बेताब था |सीमा ने एक ही झटके मे, मेरी पेंट उतार दी और मेरे कुछ करने से पहले ही, मेरे लंड को आज़ाद कर दिया | मेरा सावला सा मोटा सा लंड देखकर, सीमा की आँखों मे चमक आ गयी और उसने मेरे बचेकुचे कपडे भी उतार दिये | अब हम दोनों ही पुरे नंगे थे और सीमा ने मेरा लंड अपने हाथो मे ले रखा था और उसको अपने चूत पर रगड़ रही थी | मैने अब आगे बढकर सीमा का चेहरा अपने हाथो मे ले लिया और उसके होठो पर अपने होठ रख दिये और उनको मस्ती मे चूसने लगा आआ…ओऊ….हम दोनों का शरीर मस्ती मे हिलने लगा था और सीमा मेरा लंड अब भी अपनी चूत से रगड़ रही थी | मैने उस मौके का फायदा उठाया और उसके हाथ मे ही, अपनी गांड को जोर से धक्का मार दिया और मेरा लंड, सीमा की चूत मे ssrrrrrrrrrr…..करता हुआ घुस गया |
के मुह से चिक निकल गयी ईईईईईई………ईईईईए………aaaaaaahhhhhhhh………….मर गयी और मेरी गांड लगातार चल रही थी और हम दोनों ही मस्ती मे अपनी गांड हिला रहे थे ऊऊ…..एस…….ओऊ…..वाह…….सीमा…….नील….आ….मर गी…जोर से..तेजी से….और कुछ ही मिनटों मे सीमा ने अपनी गांड को और जोर से हिलाना शुरू कर दिया और एक गरम पिचकारी के साथ, उसका वीर्य उसकी चूत से बाहर आ गया | मेरा लंड भी चिकना हो चुका था और उसकी चूत मे फिसलने लगा | मैने अपने लंड बाहर निकल लिया और अपने हाथ से सीमा के ऊपर मुठ मारने लगा | कुछ सेकेण्ड बाद ही, मेरे लंड से एक गरम पिचकारी, सीमा के पेट पर गिर गयी और सीमा चिल्ला उठी आआआआअ…………………oooohhhhhh…बहुत ही गरम है |हम दोने के चेहरे से एक ख़ुशी की लहर थी और संठुति थी | मै जमीन पर गिर पड़ा और सीमा भी मेरे ऊपर आकर लेट गयी | हम दोनों काफी देर तक ऐसे ही लेते रहे और फिर से संभोग किया | आह भी हम दोनों मस्त संभोग करते है और मज़े लेते है |

वैधानिक चेतावनी

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