सोमवार, 25 जनवरी 2016

दिखा दे अपनी मर्दानगी


हाई दोस्तों,
मैं एक कॉल सेंटर में काम करता था और मेरे साथ एक लड़की भी वही पे काम करती थी, उसका नाम रेशमा था | हम दोनों लग भाग वहा पे करीब पाँच साल से काम कर रहे थे | जेसा की आपको पता था की में अकेला रहता हूँ तो वो मुझे अक्सर अपने घर बुला लेती थी, उसके घर पे कोई कुछ नही कहता था और उसके घर वाले एक दम खुल के रहते थे | उसका बाप ऐसा था की घर पे सब मिल बैठ के शनिवार को सब ड्रिंक लेते थे | मैं तो पहले नही पिता था जब से उनके घर जाने लगा था तब से मुझे भी चड गयी थी पीने की | ये बात जो में आपको बता रहा हूँ ये जुलाई महीने की थी और उस महीने में रेशमा का बाप अपने काम के चक्कर से बाहर गया हुआ था | सो हर वक्त की तरह एक दिन में उसके घर गया और काम से आने के बाद उसकी माँ ने ड्रिंक लगाई थी | हम सब ने मिलके ड्रिंक ली और एक दूसरे से काफी सारे बाते की, ड्रिंक खतम होने के बाद रेशमा का फोन आया सो वो फोन लेके किसी से बात करने लग गयी थी, और कुछ देर के बाद मुझे कस के सुसु लगी तो में बाथरूम चला गया पर जल्दी ज्डली में कुण्डी लगाना भूल गया और मूतने लगा |
मैं मुठ ही रहा था की इतने में रेशमा भी अंदर घुस गयी, उसे बिकुल भी पता नही था की में अंदर हूँ और वो कुछ पल के लिए मेरे लंड से मूत निकलते हुए देख रही थी और फिर हस्ते हुए वो बाहर चली गयी | मुझे उसपे बहुत गुस्सा आया और में मूतने के बाद उसके पास गया और गुस्से में उससे पूछा की देख के अंदर नही आ सकती थी क्या ? वो बोली मूतने से पहले कुण्डी नही लगा सकता था क्या | उसकी माँ वहा नही थी जहा हम बात कर रहे थे, उसकी माँ ड्रिंक लेने के बाद किचन चली गयी थी रात के खाने के लिए |इतना कुछ हो गया और फिर में छत चला गया और वहा जाके सिगरेट पीने लगा, कुछ देर के बाद वहा रेशमा भी आई उसे पता था की में सिगरेट पिता हूँ सो वो मुझे कुछ नही बोली और मुझे सिगरेट पिता देख उसने मेरे हाथ से सिगरेट ले लिए और खुद पीने लगी | मुझे थोडा अजीब लगा की वो कब से पीने लगी सिगरेट और उसके पीने के ढंग से लग रहा था की वो इससे पहले भी काफी बार पी चुकी हे पर कब पी वो मुझे नही पता और मुझे जादा हैरानी इसीलिए नही हुई क्युकी कॉल सेंटर में ये सब मामूली बात हे |
फिर वहा की बात भी हो गयी और फिर हम दोनों निचे आ गए, निचे आके देखा की आंटी अब भी खाना गर्म कर रही थी तो तब तक रहम बोली चल समीर आज थोडा और पि लेते हे, मेने कहा मुझे और नही पीना खाना खाना हे मुझे | जादा पी लिया तो आज भूका ही लुडक जाऊंगा, वो बोली चिंता मत कर मैं तुझे टपकने नही दूंगी | मेने कहा फिर ठीक हे चल वोदका लगा, उसने चार ग्लास लगाई और खुद तीन पी गयी और एक मुझे दिया | उसको काफी चड गयी थी जो की उसके लाल आँखों से ही पता चल रहा था, मेने उसको देखा की उसकी आँखे भी कुछ और कह रही थी और बार बार मेरी चड्डी की तरफ दख रही थी और फिर मुस्कुरा रही थी | यहाँ तक फिर बात हो गयी और हम खाना खा लिए और फिर जा के मैं उसके बाप के कमरे में सो गया और वो माँ बेटी एक साथ सो गए | मेने अपने रूम का दरवाज़ा लगा दिया और फिर sucksex साईट खोल के उसमे कहानिया पढ़ने लगा और कुछ बारह बजे के आस पास में कमरे का दरवाज़ा खटखटा, मेने फट से साईट को मिनिमैज़ कर दिया और उठ के दरवाज़ा खोलने लगा मुझे लगा की आंटी होगी क्युकी वो पहले भी जब भी में उनके घर पे रहा वो रात को पानी देने आती थी |
मगर मेने जब दरवाज़ा खोला तो देखा रेशमा थी और वो अंदर घुस आई और बोली की माँ सो गयी हे और उसे नींद नही आ रही और मेरे बगल में लेट गयी | उसने मेरा लैपटॉप लिया और साईट का पेज खोल दिया मेरी सुख और मेने झट से लेके लैपटॉप बंद कर दिया, उसको हल्का सा शक हुआ और मुझसे पूछने लगी की क्या पढ़ रहे थे ? मेने कहा कुछ नही सो जाओ कस के नीद आ रही हे और फिर वो सो गयी और मैं भी |बहुत देर के बाद मेरा हाथ खुद उसके कमर पे चला गया और मेने ध्यान दिया की उसने फिर मेरे हाथ को कमर से हटा के अपने चुच्चो पे रख दिया | वोदका का जादा ही सुको चड गया था पर मुझे काफी मज़ा आ रहा था की आज कुछ न तो कुछ पक्का मिलेगा मुझे | मैं उसके चुच्चो को दबाने लगा और उसकी साँसे तेज होने लग गयी थी मैं धीरे धीरे उसके चुच्चे और कस कस के दबाने लगा और फिर धीरे धीरे उसको चूमने की कोशिश की और फिर उसके गले पे और उसके कान पे मेने किस किया और वो मचल उठी | अब वो मुझे चूमने लगी और मेने उसका पूरा का पूरा साथ दिया |
उसने अब तक अपनी आँखे बंद रखी थी और अब उसने अपनी आँखे खोल दी और मुझे नशीली आँखों से देखने लगी | उसने अब मेरे होठो पे अपने होठ रख दिए और मेरे जीभ के साथ अपने जीभ को लादने लगी और मेरे जीभ को वो चूसने लगी, उसका होठ मीठा मीठा सा था और मुझे भी चूसने में मज़ा आ रहा था | मेने अब धीरे धीरे अपना हाथ उसके कमर पे रख दिया और उसकी नाइटी उपर करने लगा और फिर कुछ ही पलो में कमर के उपर उठा दिया, उसने अंदर गुलाबी रंग की पेंटी पेहेन रखी थी और में उसकी कामुक पेंटी को दख के उसे सूंघने लगा और कसम से दोस्तों उसकी पेंटी सूंघने में मुझे काफी मज़ा आ रहा था, उसकी पेंटी सूंघने के बाद मुझे काफी जोश आ गया और मेने उसकी पूरी नाइटी उतार दी और उसे मेने अब बस पेंटी और ब्रा में ही छोड़ दिया |मैं फिर उसके उपर लेट गया और उसके जिस्म को सूंघने लगा और उसके चुच्चो को मसलने लगा, उसके चुच्चे दबाने में मुझे काफी मज़ा आ रहा था की मेने उसकी  ब्रा को ही उतार दिया और उसके ब्रा उतारते ही उसके चुच्चे उछाल के बाहर आ गए |
मैं एक दम से उसपे टूट पड़ा और उसे काटने लगा और उसके मुह से अह्ह्ह्ह्ह्ह इस्स्स ओह्ह्ह्ह्ह माई गोड उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह कर कर के आवाज़ करने लगी, और में उसके चुच्चो को चूसता रहा और फिर एक दम से निचे की तरफ गया और उसकी पेंटी भी उतार दी | मेने जब उसकी पेंटी उतारी तो देखा की गुलाबी पेंटी पे सफ़ेद सफ़ेद कुछ लगा हे और उसकी चुत पे भी वोही लगा था |उसकी चुत से अजीब सी महक आ रही थी और मेने उसे सूंघते हुए उसकी चुत पे मुह रख दिया जो की एक दम चिकनी और साफ़ थी और मुह रखते ही वो उछाल पड़ी और मेरा सर पकड़ के अपने चुत में दबाने लगी और फिर अचानक उसके मुह से वो बात निकली जो मेरे लंड के लिए होरलिक्स बन गया वो बोली, बेहेंचोद तू कितना खुश नसीब हे की बिना मेहनत के चिकनी चुत मिल रही हे तुझे और वो भी उसी लड़की के घर पे रात में, खा ले मेरी चुत को बना ले अपनी प्राइवेट रांड मुझे | इतना सुनते ही में उसकी चुत को अपने दातो से काटने लगा और चूसने लगा और करीब दस मिनट बाद उसने मेरे सर के बालो को पकड़ा और मुझे उपर की तरफ खीच और मुझे चूमने लगी और फिर कुछ देर के बाद मैं खड़ा हो गया और    मेने अपने कपडे उतार दिए और वो मेरे लंड को देख के झट से उठ के निचे बैठ गयी और मेरे लंड को अपने हाथो में लेके दबाने लगी |
थोड़े देर के दबाने के बाद मेने लंड लेके उसके मुह में डाल दिया और वो छोटे बच्चो की तरह उसे चूसने लगी और करीब पाँच मिनट के चूसने के बाद मेने उसे उठाया और  बिस्तर पे लेता दिया और एक तकिया लेके उसकी गांड के निचे रख दिया और अब उसकी चुत एक दम मेरे पास लंड के पास था, अब मेने सोचा की उसे थोडा तद्पौं तो मेने अपना लंड लिया और उसकी चुत पे रख के रगड़ने लगा और वो धीरे धीरे गर्म होती गयी और अंत में उसने अपने मुह से निकाल ही दिया और बोली बेहेंचोद फाड़ दे मेरी चुत दिखा दे अपनी मर्दानगी | इतना सुनते ही मेने अपना लंड लिया और चुत के छेद पे रखा और घुसेड इया और साली कस के चिल्ला उठी जोर से और चीख पड़ी  बोली साले लंड बाहर निकाल चुत फट गयी निकाल अपना लंड, पर मेने उसकी एक न सुनी और उसपे लेट गया और उसके होठो पे अपना होठ रख दिया और चूसने लगा और निचे से लंड को अंदर बाहर करते रहा | थोड़े देर के बाद उसकी चुत एक दम चिकनी हो गयी और मेरा लंड अब आराम से अंदर बाहर हो रहा था, और हम दोनों को अब भरपूर मज़ा आ रहा था | वो अब मेरे कान में धीरे धीरे बोल रही थी की साले कमीने इतना प्यार और मजेदार लंड कहा छुपा रखा था चोद मुझे और कस कस के चोद मुझे और बना से अपनी रांड |
मेने इतना सुना और अपनी गती बड़ा दी और फिर थोड़े देर के बाद महसूस हुआ की वो झड गयी पर मैं रुका नही और कस कस के उसे पेलता रहा और वो मुझे कस के पकड़ी रही और में शोट पे शोट देता रहा |थोड़े देर के बाद मुझे लगा की मेरा निकलने वला हे तो मेने उससे पलते हुए पूछा की बता कहा निकालूं चुत में या मुह में, और वो बोली चुत में नही राजा मुह में, और फिर मेने चुत से लंड निकाल के मुह के सामने लेके गया और फिर लंड हिलाने लगा और फिर कुछ ही पलो में मुठ निकल गया और मुठ उसके होठो से होता हुआ उसके नाक पे फिर उसके सर पे और फिर सर के उपर बिस्तर पे एक लम्भी लाइन बनाता हुआ गिर गया | उसने फिर एक प्यारी सी मुस्कान दी और फिर अपनी आँखे बंद कर ली | हूँ दोनों काफी थक चुके थे और फिर एक दूसरे के उपर नंगे लेट गए और एक दूसरे के उपर सो गए | करीब एक घंटे बाद उठे और फिर उसने मुझे किस किया और थैंक यु कहा और फिर चली गयी अपनी माँ के पास और वही सो गयी |अब इसके बाद जब भी हमे मोका मिलता हम सेक्स करते रहे और जब भी करते ऐसा करते जेसे जन्मो के प्यासे हे | उसके घर पे तब तक ही कर पाए जब तक सुका बाप नही आया और उसके बाप के आने के बाद अक्सर हमे ऑफिस में ही करना पड़ता था या फिर अपनी गाडी को ऑफिस से आते वक्त रस्ते में रोक के कर लेते थे |
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