बुधवार, 20 मार्च 2013

बरसों बाद सुहागरात वाला सुख

नमस्कार दोस्तों,
आज मैं आपको अपनी बीवी का साथ बिताया चुदाई का बरसों बाद पुराने सुख के बारे में बताना चाहता हूँ | दोस्तों मैं अपनी कंपनी के काम सिलसिले में बहार देश में गया हुआ था जिसके लिए मुझे अपने घर से जाये हुए ४ साल हो गए थे | वहाँ मैं चाहे तो और किन्ही लड़कियों की मस्तानी चुत मार सकता हूँ पर शायद आप नहीं जानते की मैं अपनी बीवी से बेहद प्यार करता हूँ और मैं उसके अलावा किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकता और अपने काम में व्यस्त होकर केवल अपनी बीवी की ही चुत को याद किया करता | वहाँ बहार रहकर मुझे अपनी बीवी की चुत बहुत याद आ रही थी और आखिरकार ४ साल बाद मैं घर वापस भी रह रहा था | मुझे घर को वापस लौटते समय केवल अपनी बीवी की चुत के सपने ही आ रहे थे और पुरे सफर भर मेरे लंड ने बैठने का नाम भी नहीं लिया |
अब मैं जैसे ही अपने घर पंहुचा तो मैंने पहले अपनी बीवी को अपनी गौद में उठा लिया और उप्पर से उसके चुचों को भींचने लगा जिसपर वो खेने लगी “जान. . इतनी भी क्या जल्दी है . . ! !” मैं अब और तरसता जा रहा था और वो अंदर कमरे में चली गयी और जब कुछ देर बाद ई तो मैंने देखा की उसने वही कपड़ों को पहना था जोकि सुहागरात में पहना हुआ था |मेरी उत्तेजना और बढती जा रही थी और मैंने उसे अपनी तरफ खींच लिया | मैंने उसे हरी से अपनी गौड़ में उठाते हुए बिस्तर पर चडा लिया और उसे उत्तेजित करते हुए उसकी साडी को मस्त तरीके से संवारते हुए उतार दिया और जिससे अब वो अपनी ब्रा और पैंटी में रह गयी | मैंने उसे वहीँ बिस्तर पर उसे बिलकुल नंगी कर उसके गुलाबी होठों को चूसता उसकी चुचों को मसलत हुआ पीने लगा | मुझे उन् पुराना सुसन का स्वाद अब बहुत ही लुभा रहा था और मैं बहुत जल्द ही उसकी चुत को रगड़ने लग |
अब तो वो भी गरमा चुकी थी इसीलिए अब मैंने उसके उप्पर चड़ते हुए अपने तने हुए लंड को उसकी दोनों टांगों को चौड़ाये हुए चुत में टिका दिया और मस्त वाले धक्के देने लगा | मेरी बीवी आह्हहह्हा हहह्हह्हा हहह्हहः उईई माम्मामामा ममम्मा करके उसी तरह चिल्ला रही जिस तरह वो अपनी सुहागरात पर चिल्ला रही थी | मैं अब सारे दर्द और काम की टेंशन को जैसे भुलटा ही जा रहा था | मुझे अभी असली सुखा और वासना के बाम का असर हो रहा था | अब मैंने चुदाई को और रोमांचित बनाते हुए उसके चुचों के बल बिस्तर पर लिटाया और उसकी चुत के नीचे तकिया को रख दिया | अब मैं उसकी उभरी गांड की तरफ से पीछे अपने लंड को टिकाये हुए बड़े बेदर्दी धक्के दिए जा रहा था और उसकी हर दर्द भरी चींख में मुजे मज़ा मिल रह था | इस तरह मैंने दूसरी बार उसकी टांग को उठाका चुदाई के खेल को २ घन्टे तक दौडाया और जैसे ही मेरा गाढ़ा मुठ निकला तो मैं चैन की सांस लेता हुआ वहीँ निढाल होकर सो भी गया |
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