हाई दोस्तों, मैं अब अपना परिचय भी क्या दूँ , बस समझ लीजिए प्यार से लोग मुझे चुत का पुजारी कहते हैं | मैं अकसर अपनी कई प्रेमिकयों के साथ तो चुदाई कर चूका हूँ पर एक दिन अपने ही रिश्तेदार की छोकरी की चुत की झील भी देख ली जिसकी कहानी मैं आपको बताने जा रहा हूँ | मैं अपनी पढाई पूरी कर नयी नौकरी की तलाश में नए शेहर के लिए रवाना हुआ और वहाँ अपने पुराने रिश्ते में लगने वाले भईया के यहाँ रुका हुआ था | उनकी एक बहन भी थी जिसका नाम पिंकी था | उनकी बेहेन उम्र में तो मेरे ही आस – पास की ही थी और बड़ी ही खूब सूरत भी लग रहीं थी | जब मैंने उसे पहली बार देखा तो उसने छोटा सा कच्छा पहना हुआ जिसके नीचे से उसकी नंगी सपाट दिख रही थी |पहले कुछ दिनों मैं भईया के साथ उनकी कंपनी के नौकरी के तलाश में पूरा दिन घर से बाहर रहता और आखिर में जब मेरी नौकरी पक्की हुई तो भईया अपने काम के सिलसिले में बाहर चले गए पर उनकी माँ के कहने पर मैं दो दिन के लिए वहाँ और रुक गया | बस वो दिन ही काफ़ी थे पिंकी के साथ सुहागरात मनाने के लिए | उस दिन पिंकी के अपने कॉलेज से आने के बाद हमारी इधर उधर के विषय के उप्पर बातें शुरू हो गयी | बातें करते – करते पता चला की पिंकी बहुत खुले विचारों की है उसने मुझे अपने बारें में लग भाग सब कुछ बता दिया | उसने अपने पुराने प्रेमियों के संबंधों के बारें में भी बताया और मुझसे पूछने पर मैं बाबा ब्रह्मचारी की तरह ना भर दी |उस रात हम टी.वी देखते – देखते सो गए पर अचानक रात के दो बजे मुझे आए कामुक सपनो के कारण मेरी आँख खुल गई | मैंने देखा की मेरी चड्डी भी गली हो चुकी थी | इससे पहले मैं फिर सोता तो देखा की हलकी – हलकी चान्दिनी रौशनी में मेरे सामने एक हलक सा टॉप पहने और छोटा सा कच्छा पहने पिंकी सो रही थी | मैं देखते – देखते गरम होने लगा और मेरा लंड खड़ा हो गया धीरे – धीरे जाने कब मेरे हाथ उसे सहलाने लगे और मैं पहले उसके टॉप के उप्पर उसके स्तनों के चूता और फिर अपना हाथ अंदर देने लगा | मेरी आँखें नशीली हो चुकी इतने में मेरा हाथ उसकी काछे के उप्पर सही चुत के उप्पर जोर देने लगा इतने में चोंती हुई पिंकी उठ गयी और मुझे सवाल कर बैठी | मैं कुछ ना कह सका और अचानक मेरी गांड में ना जाने कहाँ से दम आया और मैंने उसके गालों पर हाथ फेर डाला जिसपर वो बस मुझे देख ही रही थी तभी मैंने उसकी गर्दन को चूमने लगा और अपने एक हाथ से उसके स्तनों को भींचने लगा |मेरे इतने भारी प्रहार के सामने पिंकी ने हार मानते हुए मुझे सहयोग करते हुए चूमने लगी और मेर पैंट की ज़िप खोल मेरे लंड को निकाल कर मसलने लगी | मैं जोश में आया तो उसे वहीँ लिटाकर उसके कपड़े खोल खुद भी नंगा हो गया और उसके चुचक को चूसने लगा जिसपर वो धीमे से “आहाह्ह हाह्ह्ह्ह” करके सिस्कारियां भरने लगी | कुछ १५ मिनट बाद मेरे हाथ सह्कुशल उसकी पैंटी के पास पहुँचते हुए उसे उतार कर उसकी चुत को पर पहुँच गए और धीरे – धीरे मेरी उँगलियों ने प्रवेश करते हुए अपनी संख्या ४ तक बड़ा ली | तभी मैंने अपने नागराज को जगा और उसके उप्पर लेटकर अपने हाथों उसकी चुत का रास्ता दिखलाया | कुछ देर बाद मैंने अपने लंड को उसकी चुत में देते हुए धक्का मारने लगा और अपनी गति अपरम्पार कर दी |हम अब खूब जोश में थे मैंने उसकी गांड पर थपड मारते हुए अपने लंड को उसकी योनी में नचाता रहा और वो भी मस्तमौला होकर अपनी प्रवेश द्वार को चिर्वाने लगी | हमारी गति बहुत तेज हो चुकी थी जिस्समे मेरा लंड किसी मटके में चमच के घूमने की तरह खनक रहा था | अंतिम चरम पर हम एक साथ ही झड गए और मेरा सारा वीर्य उसको चुचों पर छिडका हुआ था | मैंने वहीँ के कपड़े से अपने आपको पूछता हुआ उसकी बाहों में चैन से लेट गया | अचानक मेरी आँख खुली तो सुबह की चारा बज रहे थे और हम नंगे ही एक दूसरे के उप्पर पड़े हुए थे | मैंने जल्दी से उसे जगके अपने कपड़े पहने और सुबह होने से पहले अलग सो गए | उसी शाम को मैं अपने शेहर भी रवाना हो गया और जाते वक्त उसने मुझे प्यारी सी चुम्मी भी दे | इस बहाने मुझे हमेशा के लिए नौकरी और एक चुत भी मुफ्त में मिल गयी |
मंगलवार, 9 अप्रैल 2013
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