गुरुवार, 21 मार्च 2013

लेस्बियन नाईट्स में जानी चूत की ताकत[ भाग-2]

पहले भाग में मैंने बताया कि कैसे हमारी चूत पर अपना कब्जा जमाके मेरे दोस्त के बड़े भाई ने मुझे बेड पर पटक दिया था। लेकिन जीतना हमें था, वो हैवान अपना हैवान जैसा मोटा लंड मेरे चूत पर रगड़ रहा था। झांटो से ढकी मेरी देसी चूत के काले पन से उसका इमान और काला हो गया था और मेरे बचने की सारी उम्मीद मुझे खत्म होती नजर आ रही थी। उसने मेरे दोनो पैर हवा में उपर की तरफ़ उठाते हुए मेरी लंबी चिकनी गोरी गोरी टांगों को खोल दिया। मेरी योनि के दरवाजे उसके सामने खुला हुआ था। उस शैतान के अंदर शैतानी वासना जग चुकी थी जो सिर्फ़ मेरी जवानी के रस को पीकर ही खत्म होने वाली थी। लेकिन मेरे लेस्बियन दोस्तों कैसे मैं लीला अपनी चूत में उसके लंड को रासलीला करने देती। मेरे चूत के रस की अमानत सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरी सखियों के जीभ के रस की प्यासी है।
उस वासना के पुजारी ने मेरा रेप करने का पूरा प्लान बना लिया था। मुझे बेड के किनारे खीच कर उसने मेरी टांगे हवा में उठा दी थीं और अपने मोटे शैतानी लंड को मेरे चूत के छेद के चारो तरफ़ रगड़ने लगा था। उसने मेरी चूत की गुलाबी फ़ांकें खोली और अपनी उंगलियां मेरे छोटे छेद पर फ़िराने लगा। अभी उसकी उंगलियां बाहर ही थीं कि पता नहीं उसे क्या सूझा, उसने मेरी शर्ट फ़ाड़ दी। मेरे चूंचे बाहर किसी आजाद कैदी की तरह निकल आये। 36 के साईज के चूंचे पर 28 कमर मेरी इतनी पतली दिखती थी कि मेरे उपर मेरे नजदीकिओं की नीयत खराब हो जाती थी। उसने मेरे निप्पलों को अपने नाखूनों से नोच लिया। मुझे अजीब सी सनसनी हुई और मेरे चूंचे से खून बहने लगा। वो हैवान की तरह उस खून को चाटने लगा। शुक्र है मेरी दोस्तों कि मैं अभी तक क्वारी थी, क्योंकि मेरी कौमार्य झिल्ली फ़टी नही थी और वो भी इसलिये कि उसका शैतान जैसा मूसल लंड मेरी छोटी क्वारी चूत में घुसा नही था।
वह मेरे चूंचे मसलता रहा और मेरे अंदर गुस्सा और नफ़रत पैदा होती रही इन मर्दों के लिये। सच  में मैं उसे मार देने वाली थी और जब उसने मुझे नीचे गिरा दिया। मैं पलंग से गिर पड़ी, मेरी कमर में चोट लगी। उठ के बैटने के बाद अपना लंड उसने मेरे चेहरे के सामने कर दिया, जैसे कि मेरी आंखों में पेलने वाला हो। मैंने कुछ सोच लिया था। मै चिल्लाने वाली थी दुबारा कि उसने फ़िर मुझे एक तमाचा मारा और मेरी आंखें खुल गयीं। उसने अपना मोटा लंड मेरे मुह में डालने के लिये अपना लंड मेरे मुह पर रगड़ना शुरु किया। मैं मारे गुस्से के थूकने लगी और मेरा थूक उसके सुपाडे को और गरम लग रहा था। मैंने आखिर उसने मेरे जबड़े अपने हाथो से खोल दिये और मेरा मुह फ़ाड़कर अपना लंड मेरे मुह में हलक तक उतार दिया। नमकीन ब्दबूदार सड़ी मछली की तरह महकता लंड मेरे मुह में लोहे के राड की तरह जलता महसूस हुआ। खैर था कि मेरी चूत अभी बची हुई थी। मैने उसके लंड को अपने मुह से निक्कालने के लिये हर कोशिश की पर वो नाकाम रही। वो धक्के पर धक्के लगा रहा था और मुझे लग रहा था कि उसका मोटा लंबा लंड मेरे कपाल को छेद कर बाहर निकल जायेगा। मैंने तुरत कुछ सोचा और जब उसका लंड मेरे हलक के पूरा अंदर था, मैंने अपना मुह बंद कर लिया और उसका शैतानी लंड कट चुका था। नब्बे प्रतिशत झूल चुका लंड खून की धारा बहाने लगा, जो मेरे मुह में भरकर अंदर जाने लगी। मैंने तुरत उसका लंड थूक दिया। कटे लंड के साथ वह हलाल होते बकरे की तरह डकार रहा था और उसके घर वालो ने तुरत उसे हास्पिटल भेजवा दिया। मैं सीधा अपना मुह छुपाए अपने घर चली आयी और तब से मैं लंडों से नफ़रत करती हूं। मेरी सहेलियों की चूत ही मेरी चाहत है और दिल की राहत है।
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