बुधवार, 27 जनवरी 2016

रात की मस्ती सुबह सर चढ़के बोले


दोस्तों, मेरा नाम सुम्मी है और मेरी उम्र २५ साल है और मै एक कॉल सेण्टर मे काम करती हु | मै एक छोटे से गावं की रहने वाली हु | मै अपनी पढाई और नौकरी के चक्कर मे शहर मे आ गयी थी, लेकिन मेरे माँ-बाप अभी भी वही गावं मे रहते है | वो शहर आते नहीं है और मै गावं जाती नहीं हु | पढाई के बाद, मुझे शहर मे ही नौकरी मिल गयी और मैने कॉल सेण्टर ज्वाइन कर लिया था | पहले कॉलेज और अब कॉल सेण्टर के माहौल ने मुझे बहुत बिगाड़ दिया | मै अपने आप को एक तरह से कॉल गर्ल समझने लगी | मुझे रोज़ रात को एक लंड की जरुरत पढने लगी | मुझे लंड की आदत लग चुकी थी और मै बिना लंड के नहीं रह सकती थी | मै रोज़ डिस्को मे जाती थी, ताकि मुझे एक मस्त और मोटा लंड मिल सके | अगर कोई मुझे चोदने के पैसे दे देता था, वो सोने पे सुहागा हो जाता था | आज मै आप को बताती हु, कि मुझे रोज़ लंड लेने की आदत कैसे लगी |दोस्तों, तब मै कॉलेज मे पढ़ती थी | मै तभी गावं से आयी थी, तो मुझे शहर के बारे मे ज्यादा जानकारी नहीं थी | मेरे माँ-बापू ने मुझे शहर मे बाहर नहीं रहने दिया, बल्कि, मुझे कॉलेज के हॉस्टल मे दाखिला दिलवा दिया | लेकिन, उस समय ना तो उनको और ना ही मुझे पता था, कि हॉस्टल मे मेरी जिन्दगी बिलकुल बदल जाएगी और मुझे उन्ही चीजों की आदत लग जाएगी, जिनसे मेरे माँ-बापू मुझे बचाना चाहते थे | शुरू-शुरू मे मुझे शहर के लोगो के साथ हिलने-मिलने मे काफी दिक्कत हुई; लेकिन, मेरी रूममेट ने मुझे सब सिखलाया | वो एक आमिर माँ-बाप की बिगड़ी हुई औलाद थी और जिद करके हॉस्टल मे आयी थी; क्योकि, जब वो घर पर थी, तो उसके माँ-बाप पर उसपर तमाम पाबंदिया लगा रखी थी | वो लड़-झगड़कर हॉस्टल आयी थी | मुझे तो वो लड़की कभी समझ ही नहीं आती थी, सारा दिन नशा करती रहती थी और रात को किसी लड़के साथ डिस्को मे चली जाती और देर रात लौट कर आती | तब तक मै सो चुकी होती थी | लेकिन, मुझे अक्सर लड़के और मेरे रूममेट के हंसने की और खुसर-पुसर आवाज़े आती थी |एक दिन मैने देखा, तो मेरी दोस्त और एक लड़का नंगे बिस्तर पर लेते थे और वो लड़का, मेरी रूम मेट के शरीर को चूम रहा था और चूस रहा था | और उन दोनों के शरीर हिल रहे थे | मुझे समझ नहीं आया, कि वो दोनों क्या कर रहे थे? मै उनको देख ही रही थी, कि मुझे लगा कि मेरी सुसु वाली जगह गीली हो गयी और वहा कुछ चिपचिपा हो गया है | अचानक से, वो दोनों हिलते-हिलते रुक गये और उस लड़के ने अपनी सुसु मेरी दोस्त की सुसु वाली जगह से बाहर निकाली और फिर, वो कपडे पहनकर चले गया | उसके जाने के बाद, मै उठी और दोस्त से सब के बारे मे पूछा; तो हंसने लगी और बोली कल सुबह बात करुँगी | मेरी दोस्त, सुबह देर से उठती थी; उस दिन भी वो देर से उठी और मैने उस दिन उसको चाय बनाकर पिलाई और रात के बारे मे पूछा | वो हंस पड़ी और बोली, आज रात तेरे साथ करवाती हु, तुझे सब पता चल जायेगा | लेकिन, उससे पहले तुझे पटाखा बनाना पड़ेगा | वो मुझे ब्यूटीपार्लर ले गयी और मेरा मेकअप करवाया और मेरे बाल बनवाए | फिर, हमने कुछ मस्त कपड़ो की खरीदारी की | शाम होते-होते, मै बिलकुल बदल चुकी थी और कोई मुझे पहचान नहीं पा रहा था |आज की रात मेरे लिए परीक्षा की घड़ी थी, क्योकि, मुझे आज अपने शरीर की खूबसूरती के साथ-साथ मेरे शरीर की कामुकता का अहसास होने वाला था | मै रात को मस्त और एक सेक्सी ड्रेस पहनकर अपनी रूममेट के साथ डिस्को गयी और वहा पर मैने पहली बार दारू पी | मेरे सर पर नशा इतना चढ़ गयी, कि मुझे कुछ होश ही नहीं रहा और कभी किसी की हाथो और कभी किसी के हाथो मे झूल रही थी | सुबह होने को आयी थी और मुझे कोई होश ही नहीं था | मेरी रूममेट और उसके २-३ दोस्त हमारे कमरे मे आ गये | आते ही सबने अपने कपडे उतारने शुरू कर दिये | फिर मेरी रूम मेट भी नंगी हो गयी और उसने मेरे भी कपडे उतारने मे मद्दत की | अब दो लड्किया और ३ लड़के कमरे मे नंगे खड़े थे; उन तीनो के लंड काले, बड़े और मोटे थे | मुझे तो डर लगने लगा | मेरा डर दूर करने के लिए, मेरी दोस्त ने दो लंडो को अपने हाथ मे पकड़ा और मेरी चूत से रगड़ने लगी और एक लंड मेरे हाथ मे पकड़ा दिया | लंड को हाथ मे लेते ही मेरे शरीर पर करंट दौड़ गया | मुझे मस्ती छाने लगी | दो लंडो की रगड़ बहुत ही मस्त थी | रगड़ के साथ-साथ मेरी दोस्त ने मेरी पूरी चूत को तेल मे चिपड़ दिया और उन दोनों लंडो को भी |वो साथ के साथ मेरे चूचो पर टूटी हुई थी और तीसरा लड़का उसके चूचो पर | वो उसकी चूत मे ऊँगली कर रहा था और उसका मुह उसके चूचो को चूस रहा था | मेरी दोस्त भी मस्ती मे अपने शरीर को हिला रही थी | फिर, उन्होंने मुझे पलंग पर धक्का दे दिया और एक लड़का मेरे ऊपर चढ़ गया और अपनी चिकना लंड मेरी चूत मे दबा दिया | मेरी चूत अभी क्वारी थी और बहुत छोटी सी थी | लेकिन, उस लड़के ने बड़ी ही तन्मयता से अपना लंड मेरी चूत के ऊपर रखा था और हाथ से अपना लंड दबाने लगा और जब उसको लगा, कि लंड सही जगह पर है एकदम अन्दर पूरी तरह से घुसा दिया  | उसका लंड बहुत थोडा सा ही मेरी चूत मे घुस पाया और वो लड़का मेरी चूत को खोलने पर लगा हुआ था | मेरे मुह से चीख निकल रही थी, लेकिन मेरी दोस्त ने मेरे मुह मे कपड़ा घुसा दिया | वो उस लड़के ने धक्के पर धक्के मारने शुरू कर दिया | लंड और चूत दोनों काफी चिकने थे, तो २-३ जोरदार धक्को के बाद उसका पूरा लंड मेरी चूत मे समा गया | मेरी चूत से खून की पिचकारी फूट पड़ी और मुझे बहुत तेज दर्द होने लगा | कुछ देर बाद, मुझे भी दर्द कम होने लगा और मैने भी मस्ती मे अपनी गांड हिलानी शुरू कर दी | लेकिन, अभी पिक्चर बाकी थी |दूसरा लड़का भी अपने लंड को पूरा तेल से तरर कर रहा था और उसने थोडा सा तेल मेरी चूत पर भी डाल दिया और उसने भी अपना लंड मेरी चूत मे डाल दिया | आज मै पहली बार चुद रही थी, वो भी दो लंड एक साथ चूत मे | मुझे लगने लगा, कि आज मेरी जान जाने वाली है | दुसरे लड़के ने भी अपना लंड मेरी चूत मे डालना शुरू कर दिया | मेरी चूत मे, बिलकुल जगह नहीं थी फिर भी वो मेरी चूत मे अपना लंड घुसाने मे तुला हुआ था | कोशिश करके उसने अपना लंड काफी हद तक मेरी चूत मे डाल दिया | अब मेरी चूत बिलकुल फस चुकी थी और मै दर्द के कारण तड़प रही थी और पुरे जोर के साथ चिल्लाना चाहती थी, लेकिन कुछ भी नहीं कर पा रही थी | मेरा शरीर सुन हो चुका था और मै हिल भी नहीं सकती थी | दोनों लंडो मे, मुझे चोदने की होड़ लगी थी | अचानक से दोनों के धक्के तेज हो गयी और एक साथ बड़ी से गरम पिचकारी मैने अपनी चूत मे महसूस की | दोनों ने एक साथ अपना गरम वीर्य मेरी चूत मे छोड़ दिया था |फिर, दोनों ने अपने लंड मेरी चूत से निकाल लिए और मेरी चूत की हालत ख़राब हो चुकी थी | मेरी छोटी सी गुलाबी चूत, फूलकर लाल हो चुकी थी और मुझसे हिला भी नहीं जा रहा था | मै बिस्तर पर ऐसे ही सो गयी; फिर, उन तीनो ने मेरी दोस्त को चोदा और चले गये | उनके जाने के बाद मेरी दोस्त ने मुझे सहारा देकर उठाया और मेरी चूत को क्रीम लगाकर मुझे तसल्ली दी | उस दिन मेरी चूत का भोसड़ा तो बन गया, लेकिन मुझे मज़ा बहुत आया और उस दिन से मुझे लंड लेने की आदत लग गयी |
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